एनएचआरसी 
उत्तर प्रदेश

पुलिस कस्टडी में आरोपी की मौत पर बवाल, NHRC ने नोेटिस जारी कर योगी सरकार सहित जिला एसपी से पूछे सवाल

जालौन में पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने  साफ किया कि आरोपी के मौत का कारण पुलिस के द्वारा किया गया थर्ड डिग्री टॉर्चर है। एनएचआरसी ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि घटना को छिपाने के प्रयास में कुछ पुलिसकर्मियों ने मृतक के परिवार के सदस्यों को भी अवैध रूप से एक थाने में हिरासत में रखा गया

शुभम पाठक

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के जालौन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां पुलिस कस्टडी में एक आरोपी के मौत की खबर ने कई सारे सवाल खड़े कर दिए है। जिसको लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश सरकार , राज्य पुलिस प्रमुख (DGP) सहित एसपी को भी नोटिस भेजा है। एनएचआरसी के रिपोर्ट की माने तो आरोपी की मौत का कारण पुलिस का थर्ड डिग्री टॉर्चर है।

जालौन में पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने  साफ किया कि आरोपी के मौत का कारण पुलिस के द्वारा किया गया थर्ड डिग्री टॉर्चर है। एनएचआरसी ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि घटना को छिपाने के प्रयास में कुछ पुलिसकर्मियों ने मृतक के परिवार के सदस्यों को भी अवैध रूप से एक थाने में हिरासत में रखा गया। बता दें कि जालौन के डाकोर कोतवाली क्षेत्र में टॉर्चर के कारण राजकुमार नाम के व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत हो गई।

मृतक के शरीर पर थे चोट के निशान

मामले में जांचकर्ताओं का मानना है कि मृतक के शरीर पर कथित तौर पर चोट के निशान थे, जबकि पुलिस का दावा है कि हत्या के मामले में वांछित व्यक्ति बीमार था और गिरफ्तारी के बाद बीमारी के कारण थाने में उसकी मौत हो गई। फिलहाल जांच जारी है।

एनएचआरसी ने जारी किया नोटिस

वहीं इस मामले में एनएचआरसी ने कहा कि 15 जुलाई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर पीड़ित के शव को बिना किसी को बताए जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड के बाहर छोड़ दिया और फिर मौके से भाग गए। वहीं अगर रिपोर्ट की सामग्री, यदि सत्य है, तो पीड़ित और उसके परिवार के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। ऐसा प्रतीत होता है कि "पुलिसकर्मियों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।

इसके सात ही आयोग ने यह भी कहा कि जालौन पुलिस अधिकारियों ने पुलिस या न्यायिक हिरासत में 24 घंटे के भीतर हुई मौतों के संबंध में अभी तक आयोग को कोई सूचना नहीं भेजी है। इसलिए जालौन के पुलिस अधीक्षक को एक सप्ताह के भीतर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि हिरासत में मौत के इस मामले की सूचना आयोग को 24 घंटे के भीतर क्यों नहीं दी गई।

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