प्रतीकात्मक तस्वीर  
उत्तर प्रदेश

UP में हादसों पर ब्रेक लगाएगा AI, जानें योगी सरकार का पूरा प्लान

Ai Control Traffic: उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सड़क दुर्घटना रोकने और ट्रैफिक कंट्रोल करने की कवायद की जा रही है। इस परियोजना को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।

पूजा सिंह

Ai Control Traffic In Uttar Prades: उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां आबादी के साथ-साथ वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में ट्रैफिक जाम औक सड़क दुर्घटनाएं बड़ी समस्या बन चुकी है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेने जा रही है। प्रदेश अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)  की मदद से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ( MoRTH ) ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है।

यह नवाचार करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहल राज्य बन गया है। यह देश की पहली ऐसी परियोजना होगी जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने का प्रयास करेगी। इस पूरी योजना का क्रियान्वयन जीरो कॉस्ट मॉडल पर होगा, जिसमें तकनीकी सहयोग आईटीआई लिमिटेड और अमेरिका की वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी mLogica द्वारा दिया जाएगा। परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में 10 करोड़ का विशेष प्रावधान किया है, जिससे डाटा ड्राइव गवर्नेंस मॉडल को साकार किया जा सके।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित मॉडल क्या और कैसे काम करेंगा आइए प्रश्न उत्तर की मदद से समझते हैं।

1 प्रश्न:  इस परियोजना के तहत तैयार किए जाने वाले एआई मॉडल का उद्देश्य क्या होगा?

उत्तर: इस परियोजना के तहत आईटीआई और एमलॉज‍िका टीम को तमाम विभागों की आईटी टीमों, प्रवर्तन टीमों और सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठों के साथ काम करने के लिए आदेश दिया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेजी जाएगी। परियोजना का पहला चरण छह सप्ताह का होगा। पहले चरण में दुर्घटना की रिपोर्ट, मौसम, वाहन की जानकारी, ड्राइवर का रिकॉर्ड और सड़क के ढांचे से जुड़े डेटा को इकट्ठा किया जाएगा। इन जानकारी के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल तैयार किया जाएगा। इससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाना आसान हो जाएगा। साथ ही सड़कों और राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट का भी पता चल जाएगा।

2 प्रश्न: परियोजना की सफलता के बाद परिवहन विभाग एआई का किस प्रकार उपयोग करेगा?

उत्तर: इस परियोजना की सफलता के बाद परिवहन विभाग की अन्य डिजिटल सेवाएं भी एआई से लैस हो जाएंगी। इसका उपयोग फेसलेस ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट बनवाने के लिए किया जाएगा। एआई की मदद से ही आवेदन की स्वीकृति और प्रिंटिंग का काम होगा।

3 प्रश्न: इस परियोजना से क्या फायदा होगा?

उत्तर: इस तकनीकी का पहल उद्देश्य उत्तर प्रदेश में नागरिकों को पारदर्शी, तेज़ और वैज्ञानिक परिवहन सेवाएँ प्रदान करना है। इसके लिए फेसलेस लाइसेंसिंग सिस्टम, स्वचालित परमिट प्रोसेसिंग और ई-चालान सिस्टम जैसे स्मार्टफोन शामिल होंगे। इस परियोजना के माध्यम से रीयल टाइम में धोखाधड़ी होने पर तुरंत पता चल जाएगा। वास्तविक समय में धोखाधड़ी का पता लगाना, वाहन मानचित्रण, उल्लंघन प्रवृत्ति का पूर्वानुमान जैसे स्मार्ट मॉड्यूल्स जुड़ेंगे। जिससे चालान जारी करने और ऑन स्पॉट कार्रवाई में वैज्ञानिकता आएगी। साथ ही, राजस्व प्रशासन, कर संग्रह अलर्ट, दस्तावेज़ वैधता स्कोरिंग जैसी नई सेवाएं नागरिकों और अधिकारियों को एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी।

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