Prayagraj Swaminarayan Temple Wall Collapse: महात्मा गांधी मार्ग स्थित श्री स्वामी नारायण मंदिर की पुरानी दीवार ढहने की घटना के बाद अब मंदिर के आसपास बने भवनों की सुरक्षा और मजबूती की तकनीकी जांच कराई जाएगी। महापौर गणेश केसरवानी ने मौके का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने घटना की जानकारी लेने के साथ आसपास के लोगों से भी बातचीत की। स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर की पुरानी इमारत ढहने के दौरान आसपास स्थित कई भवनों में तेज कंपन महसूस हुआ था। इसके बाद भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
महापौर ने जिलाधिकारी से बातचीत कर आसपास की इमारतों की सुरक्षा एवं संरचनात्मक स्थिति की तकनीकी जांच कराने की जरूरत बताई। इसके बाद एमएनआईटी और ट्रिपलआईटी के विशेषज्ञों की टीम गठित कर भवनों की मजबूती की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
टीम यह भी देखेगी कि घटना के दौरान आसपास की इमारतों की संरचना पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ा है। तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महापौर ने कहा कि भवनों की सुरक्षा की जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। खासकर पुराने और आसपास के निर्माण की स्थिति को तकनीकी दृष्टि से परखा जाएगा।
मामला एक होटल के निर्माण से भी जुड़ा है। महात्मा गांधी मार्ग स्थित संबंधित भूखंड पर बेसमेंट, भूतल और नौ मंजिल के होटल का मानचित्र स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद बेसमेंट की खुदाई का काम शुरू किया गया था। होटल की साइट से सटा पुराना मंदिर भवन पहले से ही कमजोर बताया जा रहा था।
बेसमेंट की खुदाई के दौरान बारिश का पानी भर गया। इसके बाद शुक्रवार देर रात मंदिर की पुरानी दीवार ढह गई। घटना के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की प्रारंभिक जांच में निर्माण एवं सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल सामने आए हैं।
दीवार गिरने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। पीडीए और पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है। बताया गया कि मंदिर के पुजारी कमलेश और होटल मालिक विपिन चौहान के बीच मंदिर की दीवार हटाने और उसे दोबारा बनवाने को लेकर समझौता भी हुआ था।
अब प्रशासन की प्राथमिकता आसपास के भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि घटना का आसपास की इमारतों की संरचना पर कितना असर पड़ा है और आगे किन भवनों में आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की जरूरत है।