Prayagraj Land Fraud Case: अतीक के परिवार एवं करीबियों की मुश्किले लगातार बढ़ती जा रही है। पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र के रसूलपुर मरियाडीह में एक ही जमीन को कथित तौर पर तीन अलग-अलग लोगों को बेचने का मामला सामने आया है। मामले में अतीक अहमद के करीबियों समेत पांच लोगों के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। तीन खरीदारों की शिकायत के आधार पर मुकदमे दर्ज किए जाने के बाद पुलिस ने अब जमीन से जुड़े बैनामों और राजस्व अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है।
मामला रसूलपुर मरियाडीह स्थित करीब 1.1640 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि इस जमीन के संबंध में अलग-अलग समय पर तीन बैनामे कराए गए। जब खरीदारों को जमीन के संबंध में अलग-अलग दावों और दस्तावेजों की जानकारी हुई तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। शिकायतों की जांच के बाद पूरामुफ्ती पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज किए हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था और आरोपितों ने किन परिस्थितियों में अलग-अलग लोगों के पक्ष में बैनामे कराए। जांच में बैनामा दस्तावेजों के साथ-साथ जमीन से संबंधित खतौनी, खसरा और अन्य राजस्व अभिलेखों को भी शामिल किया गया है।
पुलिस के सामने मुख्य सवाल यह है कि एक ही भूमि के संबंध में तीन अलग-अलग बिक्री दस्तावेज कैसे तैयार हुए। जांच अधिकारी संबंधित दस्तावेजों की तारीख, विक्रेता और गवाहों के विवरण के साथ राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कर रहे हैं। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि बैनामा कराने के समय जमीन की स्थिति क्या थी और संबंधित पक्षों के पास बिक्री का अधिकार था या नहीं।
जांच के दौरान दस्तावेजों की प्रमाणिकता, भूमि के स्वामित्व और कब्जे से संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजी जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामले में नामजद किए गए लोगों में अतीक अहमद से जुड़े बताए जा रहे लोग भी शामिल हैं। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज करने और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया में जुटी है।
तीन खरीदारों की शिकायतों पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला अब जमीन के स्वामित्व और कथित तौर पर किए गए बैनामों की वैधता की जांच तक पहुंच गया है। पुलिस राजस्व विभाग से संबंधित अभिलेख हासिल कर उनका मिलान करेगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।