Pratapgarh Kisan Samman Nidhi scam: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में करीब 3.15 अरब रुपये के घपले की आशंका सामने आई है। कुंडा तहसील क्षेत्र में बड़ी संख्या में फर्जी पंजीकरण कराकर सरकारी योजना का लाभ लेने का मामला जांच एजेंसियों के सामने आया है। कृषि निदेशालय, दिल्ली और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की जांच में गड़बड़ी के कई अहम तथ्य सामने आने के बाद जिला प्रशासन में खलबली मच गई है।
जांच में करीब साढ़े चार लाख किसानों के पंजीकरण संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके पते और अन्य विवरणों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। फर्जीवाड़े में सिर्फ प्रतापगढ़ ही नहीं, बल्कि कौशांबी और प्रयागराज के किसानों के नाम भी सामने आए हैं। इसके अलावा अमेठी और सुल्तानपुर समेत अन्य जिलों के लोगों के नाम भी संदिग्ध पंजीकरण में शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच के दौरान बड़ी संख्या में लाभार्थियों के पंजीकरण की पड़ताल की गई। इसके बावजूद 65,924 किसान अभी भी जांच के दायरे में हैं। प्रशासन अब इन किसानों के पंजीकरण, दस्तावेज, बैंक खातों और योजना का लाभ मिलने की पूरी प्रक्रिया की जांच करा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन लाभार्थियों का सत्यापन किया गया, उनमें इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध पंजीकरण आखिर कैसे पात्र घोषित कर दिए गए।
जांच में करीब 1700 आईपी एड्रेस फर्जी या संदिग्ध पाए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री किसान पोर्टल पर वर्ष 2019-20 के दौरान बड़ी संख्या में पंजीकरण कराए गए थे। प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन के बावजूद इन पंजीकरणों को पात्र ठहराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा है। अब पुलिस स्तर पर मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय किए जाने की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है।
इतने बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीकरण सामने आने के बाद योजना की स्थानीय सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि पंजीकरण के समय दस्तावेजों और लाभार्थियों का समुचित सत्यापन किया गया था तो इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध नाम पात्र कैसे घोषित हुए? जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि फर्जीवाड़े में केवल लाभार्थी शामिल थे या पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका भी रही है।
अब पूरे मामले में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है। जांच में सामने आए संदिग्ध लाभार्थियों और आईपी एड्रेस के आधार पर नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है। यदि जांच में सरकारी धन का गबन और आपराधिक साजिश साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वसूली की कार्रवाई भी हो सकती है।