इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
प्रयागराज

हापुड़ BSA का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने तीसरे मातृत्व अवकाश के मामले में नए सिरे से विचार करने के दिए निर्देश

Maternity Leave Rules India: हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म पर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश से पूरी तरह वंचित करने के आदेश को रद्द कर हापुड़ BSA को मामले पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

Allahabad High Court Order Maternity Leave: मातृत्व अवकाश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि तीसरे बच्चे के जन्म पर भी महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के लाभ से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने वाले बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) हापुड़ के आदेश को रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।

तीसरे बच्चे के लिए आवेदन किया था

मामला हापुड़ जिले से जुड़ा है। याची गीता चौधरी ने 16 और 25 जुलाई 2026 के उन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिनके माध्यम से तीसरे मातृत्व अवकाश के लिए उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया था। ये आदेश हापुड़ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से पारित किए गए थे। याची की ओर से अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

बीएसए के आदेश पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

याची की ओर से दलील दी गई कि मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 की धारा-3 में किए गए संशोधन के अनुसार महिला कर्मचारी को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी निर्धारित अवधि का मातृत्व अवकाश दिए जाने का प्रावधान है। इसी आधार पर उन्होंने अधिकारियों के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने बीएसए हापुड़ के आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारी को मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।

12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश का हक

अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि संशोधन के अनुसार याची तीसरे बच्चे के लिए 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। अपनी दलीलों के समर्थन में याची ने सुप्रीम कोर्ट के स्मृति अनुपम यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2022) और के. उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार (2025) मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला दिया।

हाईकोर्ट ने इन निर्णयों का भी संज्ञान लिया। अदालत ने विशेष रूप से के. उमादेवी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई व्याख्या पर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें कहा गया था कि दो या दो से अधिक जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।

राहुल गांधी एक फेल प्रोडक्ट हैं, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, पेश किए सबूत

MLC Election 2026 LIVE: 4 राज्यों की 28 सीटों पर वोटिंग, UP में सपा के पक्ष में माहौल; नितिन गडकरी ने डाला वोट

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव, ITBP चीफ के बयान से बवाल, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

आतंकियों के अधिकार की वकालत पर भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा, UN में सुनाया खरी-खरी, याद दिलाया कारगिल युद्ध

ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर खतरा? ओम बिरला के बयान से CEC को हटाने की मांग ने पकड़ा जोर