इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
प्रयागराज

फतेहपुर फर्जी एनकाउंटर केस में इंस्पेक्टर को राहत, हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक FIR पर लगाई रोक

Fake Encounter Case: फतेहपुर के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस इंस्पेक्टर विनोद कुमार शुक्ला के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई तक कठोर कार्रवाई नहीं होगी।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

High Court Order On Fake Encounter Case: फतेहपुर के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस इंस्पेक्टर विनोद कुमार शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक याची के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।

चार मई को हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस ने उपेंद्र उर्फ राकी नामक आरोपी को एनकाउंटर में गिरफ्तार करने का दावा किया था। इसके बाद बरामदगी के आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपी ने जमानत अर्जी में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

आरोपी ने लगाया था फर्जी एनकाउंटर का आरोप

उपेंद्र का आरोप था कि पुलिस उसे घर से उठाकर सुनसान स्थान पर ले गई और वहां उसके पैर में गोली मारकर बाद में झूठी बरामदगी दिखाते हुए एफआईआर दर्ज की गई। चार मई को अपर सत्र न्यायाधीश ने उसकी जमानत अर्जी खारिज करते हुए पुलिस टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

पुलिस अधिकारियों पर भी दर्ज हुई एफआईआर

अदालत के आदेश के बाद पुलिस अधीक्षक और थाना मऊदरवाजा के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। घटना के समय विनोद कुमार शुक्ला मोहम्मदाबाद थाने के प्रभारी निरीक्षक थे। तीन अगस्त 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

इसी आदेश को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याची की ओर से तर्क दिया गया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने स्वत: संज्ञान लेकर पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, जो कानूनी रूप से उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला दिया गया। कहा गया कि जांच की निष्पक्षता पर पीड़ित परिवार को संदेह हो तो संबंधित सत्र न्यायाधीश के समक्ष शिकायत की जा सकती है।

अगली सुनवाई तक राहत

हाईकोर्ट ने मामले में सभी पक्षों से चार सप्ताह में प्रति-शपथपत्र और उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। तब तक याची के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक रहेगी।

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