बांग्लादेशी नागरिक (सोर्स- फोटो नवभारत)
प्रयागराज

मेजा में 20 साल से चला रहा था क्लीनिक; जांच हुई थी तो निकला बांग्लादेशी नागरिक, पुलिस ने किया गिरफ्तार

Bangladeshi Citizen in Meja: प्रयागराज के मेजा में करीब 20 साल से डॉक्टर बनकर रह रहे एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक जांच में उसके बांग्लादेशी नागरिक होने के साक्ष्य मिले हैं।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

Bangladeshi Man Arrested in Prayagraj: मेजा क्षेत्र में करीब 20 साल से डॉक्टर बनकर रह रहे एक बांग्लादेशी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। रिश्तेदार महिला की शिकायत पर दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान पुलिस को उसके विदेशी नागरिक होने के संबंध में कई अहम साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान कमलेश उर्फ सुजल विश्वास के रूप में हुई है। उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।

महिला की शिकायत से खुला मामला

मेजा थाना क्षेत्र के रामनगर मोहल्ला निवासी गीता विश्वास की तहरीर पर पुलिस ने कमलेश के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। गीता का आरोप था कि कमलेश खुद को उसका ननद का बेटा बताते हुए मकान पर कब्जे का प्रयास कर रहा था। इस मामले में वर्ष 2025 में मेजा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था।

मकान पर कब्जे का लगाया आरोप

गीता ने पुलिस को बताया था कि कोरोना काल में उसके पति अमल कुमार की मौत हो गई थी। इसके बाद कमलेश ने उसकी पत्नी चंद्रकांता और बच्चों के आधार कार्ड आदि फर्जी तरीके से तैयार कराकर मकान पर कब्जा करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस की जांच में मकान कब्जे के आरोप से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।

जांच में विदेशी नागरिक होने का दावा

मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कमलेश के बांग्लादेशी नागरिक होने के साक्ष्य मिले। पुलिस के अनुसार वह मूल रूप से बांग्लादेश के देंतासी, मच्यापाड़ा और नराइल क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। उसके पिता बांग्लादेश में सरपंच रह चुके हैं, जबकि उसका एक भाई वहां सरकारी स्कूल में शिक्षक बताया गया है।

फर्जी दस्तावेजों से भारत में रहने का आरोप

पुलिस का आरोप है कि कमलेश ने भारत में प्रवेश करने के बाद फर्जी मार्कशीट, टीसी और अन्य कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया। इसके जरिए उसने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारत में लंबे समय तक निवास किया।

2011 में गया था बांग्लादेश

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कमलेश वर्ष 2011 में बांग्लादेश गया था। इसके बाद उसके भाई ने वीजा के लिए आवेदन किया था। पुलिस इस अवधि के दौरान उसके भारत-बांग्लादेश आने-जाने और दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।

गांव में क्लीनिक चलाने की बात

ग्रामीणों के मुताबिक कमलेश गांव में ‘न्यू बंगाली दवाखाना’ नाम से क्लीनिक चलाता था। करीब दो दशक से मेजा में रहकर वह चिकित्सक के रूप में लोगों का इलाज कर रहा था। अब उसके दस्तावेजों और चिकित्सकीय योग्यता की भी जांच की जा रही है।

डीसीपी ने दी जानकारी

डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद था। विदेशी नागरिक होने के आरोप में जांच के दौरान कुछ साक्ष्य मिले हैं। तहरीर के आधार पर विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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