इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया) 
प्रयागराज

बुलडोजर कार्रवाई पर कोर्ट में नहीं बनी सहमति; जजों के मतभेद में फंसा मामला, अब तीसरे न्यायाधीश करेंगे फैसला

Allahabad High Court News:उत्तर प्रदेश की बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े हमीरपुर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के दो न्यायाधीशों की राय अलग-अलग होने के बाद मामला तीसरे न्यायाधीश को भेज दिया गया है।

स्निग्धा श्रीवास्तव

High Court Verdict On Bulldozer Action: उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दाखिल एक महत्वपूर्ण याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ में मतभेद सामने आया है। दो न्यायाधीशों की अलग-अलग राय के बाद अब इस मामले को तीसरे न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया है। मामला हमीरपुर जिले में पॉक्सो और कथित मतांतरण से जुड़े एक प्रकरण में संपत्ति के ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई से संबंधित है।

तीसरे न्यायाधीश की राय के बाद होगा अंतिम निर्णय

खंडपीठ में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने मामले की सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रशासन द्वारा संपत्ति को सील करने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की आशंका के बीच संवैधानिक संरक्षण की आवश्यकता है। दोनों न्यायाधीशों की राय अलग होने के कारण अब अंतिम निर्णय तीसरे न्यायाधीश की राय के बाद होगा।

2021 में ही अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित

याचिका उस मुकदमे से जुड़ी है, जिसमें आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 67, पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 तथा उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। राज्य सरकार की ओर से अदालत में अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंका मिश्र ने दलील दी कि संबंधित भूमि सिंचाई विभाग की है और वर्ष 2021 में जनहित याचिका पर अतिक्रमण हटाने का आदेश पहले ही पारित किया जा चुका था।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने सुप्रीम कोर्ट के 'बुलडोजर जजमेंट' का हवाला देते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आधार पर उसके मकान को गिराना दंडात्मक कार्रवाई माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कम से कम दो वर्ष तक और तीन वर्ष या उससे अधिक पुराने निर्माणों को हटाने से पहले एक वर्ष पूर्व नोटिस देने जैसे सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने इन निष्कर्षों से असहमति जताई। दोनों न्यायाधीशों के अलग-अलग मत के कारण अब यह महत्वपूर्ण मामला तीसरे न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों में भविष्य की न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

सपा नेता सिनोद शाक्य को BJP ने बनाया प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही लिस्ट

Hotel Room Safety: होटल में चेक-इन करते ही करें ये 10 जरूरी काम, सुरक्षा में न करें लापरवाही

गुवाहाटी के होटल में अंधाधुंध फायरिंग, गोलीबारी में 6 लोगों की मौत; सामने आया खौफनाक VIDEO

SIR पर विपक्ष के प्रदर्शन के जवाब में सड़क पर उतरेंगे केंद्रीय मंत्री! क्या है BJP का प्लान?

SIR के तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए, चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब