प्रतीक यादव की तेरहवीं आज (कंसेप्ट फोटो- IANS) 
उत्तर प्रदेश

प्रतीक यादव की तेरहवीं आज, अपर्णा ने सुधारी पुरानी गलती, सैफई परंपरा को लेकर चर्चाएं तेज

Prateek Yadav Terahvi Card: आज अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की तेरहवीं मनाई जा रही है। अपर्णा यादव के कार्ड में अखिलेश यादव का भी नाम शामिल है। अब सैफई परंपरा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्रिया जैस

Prateek Yadav Terahvi Program: समाजवादी पार्टी के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की आज तेरहवीं मनाई जा रही है। अपर्णा यादव ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर तेरहवीं का एक कार्ड शेयर किया है। इस कार्ड में अपर्णा यादव और उनकी दोनों बेटियों के साथ-साथ अखिलेश यादव और उनके बच्चों का भी नाम लिखा गया है। यह कार्ड अब चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि इसके जरिए अपर्णा यादव ने अपनी पुरानी गलती सुधारने की कोशिश की है।

तेरहवीं के कार्यक्रम के दौरान यादव परिवार के एक साथ आने की खबरों ने जोर पकड़ लिया है। तो वहीं, दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव के सैफई गांव की तेरहवीं परंपरा भी चर्चा का विषय बन गई है। वो इसलिए क्योंकि, सैफई परंपरा के अनुसार मुलायम सिंह की तेरहवीं नहीं मनाई गई थी।

13 मई को प्रतीक यादव का निधन

13 मई को प्रतीक यादव का 38 की उम्र में अचानक निधन हो गया। वे कई दिनों से बीमारी से जुझ रहे थे। मिली जानकारी के अनुसार, दिल में खून का थक्का जमना उनकी मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है। 14 मई को प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार किया गया था। अपर्णा यादव ने अंतिम संस्कार के कार्यक्रम के लिए भी सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया था।

हालांकि, इस पोस्ट में अखिलेश यादव का नाम नहीं था। केवल अपर्णा यादवा और उनकी दोनों बेटियों का नाम लिखा गया था। वैसे देखा जाए तो प्रतीक यादव के मौत की खबर मिलते ही सबसे पहले अखिलेश यादव की अस्पताल पहुंचे थे। असम में होने के कारण अपर्णा यादव दोपहर के बाद ही अस्पताल पहुंच पाई थीं।

क्या है सैफई परंपरा

सैफई परंपरा किसी व्यक्ति के निधन के बाद तेरहवीं या सतरहवीं के दिन मनाई जाती है। इस दिन ब्राह्मण भोज और रिश्तेदारों और गांव वालों को भोज कराया जाता है। इस चलन को मुलायम सिंह के पैतृक गांव के लोगों ने काफी पहले बंद कर दिया था। गांव वालों का मानना है कि इस परंपरा से केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है। एक ओर परिवार शोक में डूबा होता है और दूसरी ओर भोज अच्छा नहीं लगता। इसलिए सैफई गांव के लोगों ने मिलकर इस परंपरा पर विराम लगा दिया था।

मुलायम सिंह के निधन पर अखिलेश ने निभाई थी परंपरा

मुलायम सिंह की मृत्यु के बाद भी इस परंपरा को निभाया गया था। मुलायम सिंह के परिवार के पास किसी भी तरह की आर्थिक समस्या नहीं थी। लेकिन सैफई गांव की परंपरा को निभाते हुए उन्होंने मुलायम सिंह की तेरहवीं नहीं की थी। इसकी जगह अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह के निधन के 11वें दिन हवन और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था। इस दौरान परिवार ने शुद्धि संस्कार किया था और अखिलेश समेत परिवार के सभी पुरुष सदस्यों ने अपने बाल मुंडवाए थे।

अब यह सवाल उठ रहा है कि प्रतीक यादव के निधन के बाद तेरहवीं का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में यादव परिवार के पैतृक गांव की सैफई परंपरा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

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