Buddhist Monastery Claim Meerut Mosque: सहारनपुर की मस्जिद के बाद अब अगला नंबर खरखौदा की मस्जिद के आने की संभावनाएं जताई जा रही है। जनपद मेरठ में अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने भी शाही जामा मस्जिद परिसर के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ होने के दावे की वैज्ञानिक जांच की मांग की है। उन्होंने कमिश्नर और डीएम को प्रार्थना पत्र देकर विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की।
मेरठ कोतवाली स्थित शाही जामा मस्जिद परिसर के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ होने के दावे की जांच की मांग उठी है। अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने कमिश्नर और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। प्रार्थना पत्र की प्रतिलिपि मेरठ जनपद के प्रभारी मंत्री असीम अरुण को भी भेजी गई है।
दरअसल, राम कुमार शर्मा ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि मेरठ प्राचीन ऐतिहासिक महत्व वाला शहर है। यहां महाभारतकालीन परंपराओं के अलावा मौर्य, बौद्ध, कुषाण और मध्यकालीन इतिहास से जुड़े साक्ष्य और परंपराएं मिलती है। उन्होंने कहा कि शाही जामा मस्जिद परिसर से जुड़े पुरातात्विक दावों की पुष्टि या खंडन वैज्ञानिक तरीके से किया जाना जरूरी है।
अधिवक्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग के यात्रा वृतांत और मेरठ जिला गजेटियर, 1904 समेत विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों का उल्लेख किया है। प्रार्थना पत्र में वरिष्ठ इतिहासकार और शोधकर्ता प्रोफेसर केडी शर्मा के दावे का भी जिक्र किया गया है।
मेरठ में मस्जिदों के नीचे किसी धार्मिक स्थल या अवैध निर्माण को लेकर अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हिंदूवादी नेता लगातार अपनी मांगें उठाते रहे है। हिंदूवादी नेताओं ने मेरठ के खरखौदा थाना क्षेत्र में स्थित करीब 200 साल पुरानी जामा मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उनका दावा था कि, यह मस्जिद पुलिस थाने की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी हुई है। इस मामले पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि, राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद ही कोई कानूनी कदम उठाया जाएगा।
राम कुमार शर्मा के अनुसार, प्रोफेसर केडी शर्मा ने शाही जामा मस्जिद की संरचना में ऐसे प्रस्तर स्तंभों का दावा किया है, जो प्राचीन मौर्य अथवा बौद्ध कालीन स्थापत्य से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं। अधिवक्ता ने कहा है कि इन दावों की वास्तविकता सामने लाने के लिए विशेषज्ञों की मदद से वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए।
प्रार्थना पत्र में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राज्य पुरातत्व विभाग, इतिहासकारों, बौद्ध अध्ययन विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों, भू-विज्ञानियों और जिला प्रशासन की संयुक्त उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है।
अधिवक्ता का कहना है कि विशेषज्ञ समिति वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच के जरिए यह स्पष्ट कर सकती है कि शाही जामा मस्जिद परिसर से जुड़े प्राचीन स्थापत्य और बौद्ध मठ संबंधी दावों में कितनी तथ्यात्मकता है।
राम कुमार शर्मा ने कमिश्नर और डीएम से मामले में आवश्यक कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने की मांग की है, ताकि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दावों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सहारनपुर में मस्जिद के मलबे के नीचे मिले कुएं की एएसआई टीम ने जांच की। टीम कुएं में उतरी। करीब 15 मिनट तक कुएं के अंदर स्थित संरचना, ईंट आदि की जांच-पड़ताल करने के बाद वह बाहर आए। एएसआई ने बताया कि कुआं 250 साल पुराना हो सकता है। प्रथम दृष्टया कुएं की संरचना उत्तर मध्यकालीन लग रही है। आगे की जांच प्रशासन के ऊपर निर्भर है। यदि खोदाई आदि का निर्णय लिया जाता है तो जांच की जाएगी।