सौरभ हत्याकांड (सोर्स- सोशल मीडिया)
मेरठ

126 तारीख, 22 से अधिक गवाह...फिर 13 महीने बाद हुआ इंसाफ; सौरभ हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन

Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को फांसी की सजा सुनाई। जानिए इस सनसनीखेज हत्याकांड की पूरी कहानी।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Highlights

  • 13 महीने की सुनवाई के बाद मुस्कान-साहिल को मिला मृत्युदंड

  • 18 मार्च को नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव

  • सौरभ के परिवार ने की थी फांसी की मांग

  • 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने दोषी माना था

Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का एक ऐसा हत्याकांड जिसने एक नही बल्कि कई जिंदगियां बर्बाद कर दी...लेकिन इंसाफ की लड़ाई ने एक बार फिर अपना मुकाम हासिल कर ही लिया। सौरभ हत्याकांड में दोषियों को सजा मिलना इस बात का सबूत है कि अपराध की राह का आखिरी पड़ाव अंत ही है। इंसाफ मिलने में देर हो सकती है, लेकिन न्याय की उम्मीद कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषियों को आज जो सजा मिली है, यह लोगों को इतना समझने के लिए काफी है कि अपराध चाहे कितना भी जघन्य क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच पाना मुश्किल है। सौरभ हत्याकांड में दोषियों को मिली सजा मात्र एक फैसला नहीं है, बल्कि अपराध की राह पर चलने वालों के लिए एक संदेश भी है कि अपराध का अंत अंततः कानून के कठघरे में ही होता है।

30 सितंबर को कोर्ट ने ठहराया था दोषी

चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। बता दें कि दोनों आरोपियों को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया था। इस मामले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी।

13 महीने तक चला मुकदमा

सौरभ राजपूत हत्याकांड का ट्रायल जुलाई 2025 में शुरू हुआ था। करीब 13 महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान 126 तारीखों पर सुनवाई हुई। इस दौरान 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आखिरकार, अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। सौरभ राजपूत के परिवार ने अदालत से दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। सौरभ के भाई राहुल ने कहा कि परिवार को शुरू से न्याय मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग थी कि भाई की हत्या करने वालों को सख्त से सख्त सजा मिले।

जानिए पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक 18 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत के भाई बबलू ने उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए अपनी भाभी मुस्कान पर संदेह जताया था। जब मामले की जांच-पड़ताल शुरू हुई तब बेहद ही खौफनाक बात सामने आई। काफी मशक्कत के बाद सौरभ के घर में ही नीले ड्रम से उसका शव बरामद किया गया। इस खौफनाक वारदात ने सभी के रौंगटे खड़े कर दिए। पूछताछ के दौरान मुस्कान रस्तोगी के बयान लगातार संदेहात्मक रहे। इसके बाद भी पुलिस ने पूछताछ जारी रखा और मामले से जुड़े कई साक्ष्य जुटाए।

पुलिस जांच में पता चला कि वारदात वाली रात सौरभ अपनी मां रेनू देवी के घर से कोफ्ते की सब्जी लेकर आया था जिसमें मुस्कान ने नशीली दवा मिला दी थी। सब्जी खाने के बाद जब सौरभ बेसुध हो गया तब मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या कर दी। इतना ही नही दोनों आरोपियों ने वॉशरूम में उसके शव के कई टुकड़े किए। उसे ब्रीफकेस में रखने की कोशिश की। बाद में दोनों ने शव को नीले ड्रम में छिपाया।

नही मिला कोई चश्मदीद गवाह

चुकी इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला इसलिए पुलिस को इस हत्याकांड के लिए सबूत जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन यह जो कहावत है अपराधी कितना भी शातिर क्यों ना हो कोई ना कोई गलती जरूर करता है। पुलिस ने मामलें में अपनी जांच तेज की और कई इलेक्ट्रॉनिक व फॉरेंसिक साक्ष्यों जुटाए। एक कैब चालक से पूछताछ में मुस्कान और साहिल के वारदात के बाद एक होटल में ठहरने की बात सामने आई। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन, होटल के रजिस्टर और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे सबूतो को एक- एक करके जोड़ा और इन साक्ष्यों को दोनों हत्यारों के खिलाफ कोर्ट में पेश किया। आखिर दोनों अपने गुनाह कब तक छिपाते, काफी सख्ती बरतने के बाद दोनों आरोपियों ने अपने-अपने गुनाह कबूल कर लिए।

लंदन में नौकरी करता था सौरभ

बता दें कि 29 साल का सौरभ लंदन में नौकरी करता था। सौरभ ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर मुस्कान से साल 2016 में शादी की थी। दोनों किराये के घर में रहते थे। दोनों की एक बेटी भी है जिसका नाम पीहू है। सौरभ के विदेश में नौकरी के कारण वह मुस्कान को ज्यादा वक्त नही दे पाता था। इसी दौरान मुस्कान का मेरठ में ही अपने हमउम्र साहिल के साथ अफेयर शुरू हो गया।

मीडियो रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों ने सौरभ की हत्या के लिए नवंबर 2024 से प्लानिंग शुरू कर दी थी। मुस्कान ने खैरनगर से नींद की गोलियां, 2 बड़े चाकू, रेजर और बैग खरीदें थे।

बेटी और पति सौरभ के साथ बनाया बर्थडे

25 फरवरी को मुस्कान ने अपना और 28 फरवरी को बेटी पीहू का बर्थडे मनाया। यहां तक सब ठीक रहा, तीनों बहुत खुश नजर आए। फिर 3 मार्च को सौरभ मां के घर से लौकी के कोफ्ते लेकर पहुंचता है, इसी कोफ्ते को गर्म करने के बहाने मुस्कान ने इसमें नींद की गोलियां मिला दी और जब सौरभ बेहोश हो गया तो साहिल को बुलाकर दोनों ने बेहोश सौरभ पर ताबड़तोड़ वारकर उसकी हत्या कर दी।

दरिंदगी की हद देखिए, दोनों ने सौरभ का सिर धड़ से अलग कर दिया और शरीर के कई टुकड़े किए। प्लान तो सौरभ के टुकड़ों को अलग-अलग जगहों पर फेंकने का था लेकिन दोनों ने 5 मार्च को नीले ड्रम में सीमेंट मिलाकर शव को ड्रम में ही सील कर दिया। इस खौफनाक वारदात के बाद दोनों शिमला घूमने चले गए और खूब मस्ती भी की। पुलिस ने दोनों को 18 मार्च को गिरफ्तार किया और शव के टुकड़ों वाला ड्रम भी बरामद कर लिया।

जेल में बच्ची को किया जन्म

मुस्कान रस्तोगी ने 24 नवंबर को एक बच्ची को जन्म दिया था, बच्ची का नाम उसने राधा रखा। लेकिन राधा के जन्म को लेकर भी सवाल उठे कि आखिर बच्ची का असली पिता कौन है?

बताया जाता है कि जब मुस्कान को बॉयफ्रेंड साहिल के साथ गिरफ्तार किया गया था तब मुस्कान रस्तोगी डेढ़ महीने की गर्भवती थी, ऐसे में दावा तो यह किया जा रहा है कि वह बच्ची बॉयफ्रेंड साहिल की हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टी अभी तक नही हुई है। सौरभ राजपुत के परिवार ने बच्ची के डीएनए टेस्ट की मांग की थी।

सौरभ के बड़े भाई राहुल ने कहा था कि बच्ची का डीएनए टेस्ट कराएंगे। अगर वह सौरभ की बेटी हुई तो ही उसे अपनाएंगे। लेकिन अगर डीएनए रिपोर्ट में उसका पिता साहिल हुआ तो राधा किसके पास जाएगी? नाना-नानी या साहिल का परिवार उसे स्वीकार करेगा? या बाल संरक्षण विभाग, राधा की देखभाल का जिम्मा उठाएगा? हालांकि सजा मिलने के बाद मुस्कान ने अपनी बच्चियों की देखभाल करने की बात कही है।

अपराधी को उसके अपराध के लिए सजा देना धर्म

करीब 13 महीने तक 126 तारीखों पर सुनवाई के बाद जिला जज अरविंद कुमार ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाते वक्त जज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधी को उसके अपराध की सजा देना भी धर्म है। बता दें कि 5 महीने पहले ही अरविंद कुमार मिश्रा जिला जज बनाए गए थे। इससे पहले वह मिर्जापुर पोस्टेड थे।

16 जुलाई 2008 को अरविंद कुमार को सिविल जज (सीनियर डिविजन) नियुक्त किया गया था। उसी दिन उन्हे क्लास-1 अफसर का दर्जा भी दिया गया था।

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