Meerut Digital Arrest Scam: साइबर अपराधियों ने मेरठ के युवक से छह लाख रुपये की साइबर ठगी की घटना को अंजाम दिया। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। कंकरखेड़ा थानाक्षेत्र स्थित नंगला ताशी के रहने वाले व्यक्ति के पास एक कॉल आई और आरोपी ने खुद को पुलिस विभाग से बताया। जेल भिजवाने की धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट किया गया।
छह लाख रुपये की रकम साइबर अपराधियों ने हड़प ली। इस मामले में पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने आरोपी का खाता ब्लॉक कराया है। वहीं, साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
दरअसल मेरठ में साइबर ठगी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। इस साल सात महीने में करीब 900 लोग साइबर ठगों का शिकार हुए और दो करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम गंवाई। लेकिन, राहत की बात यह है कि, मेरठ पुलिस ने साइबर ठगों पर कार्रवाई करते हुए 365 पीड़ितों की 1.90 करोड़ रुपए से अधिक की रकम वापस कराई है।
वहीं साइबर अपराध में इस्तेमाल 1,382 मोबाइल नंबर और 2,179 आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए हैं। फर्जी कस्टमर केयर, निवेश, नौकरी, केवाईसी, पार्सल और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से ठगी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि, साइबर फ्रॉड होने पर जितनी जल्दी शिकायत होगी, ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी।
बता दें कि, स्वतंत्रता का अर्थ आज केवल सुरक्षित घर, सुरक्षित सड़क और सुरक्षित समाज नहीं है। तेजी से डिजिटल होते भारत में सुरक्षित डिजिटल जीवन भी हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम अपने घर का दरवाजा बंद करते हैं, उसी प्रकार डिजिटल अकाउंट की सुरक्षा भी आवश्यक है। हम अपना पैसा सुरक्षित रखते हैं, उसी प्रकार ओटीपी यूटीआई पिन और पासवर्ड को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। साइबर एक्सपर्ट हेड कांस्टेबल उमेश कुमार बताते हैं कि साइबर फ्रॉड में गोल्डन ऑवर महत्वपूर्ण है। जितनी जल्दी शिकायत, उतनी ही धनराशि सुरक्षित किये जाने की संभावना बन जाती है।
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि, किसी भी व्यक्ति से ओटीपी यूपीआई पिन सीवीवी पासवर्ड और बैंकिंग पीन साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एसेसरीज स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन इंस्टॉल न करें। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सोशल मीडिया एवं बैंकिंग अकाउंट पर टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें। ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट, नौकरी अथवा अत्यधिक लाभ देने वाले प्रस्तावों को सत्यापित किये बिना पैसा न भेजें। पुलिस, बैंक, सरकारी एजेंसी या कंपनी के नाम से आने वाले संदिग्ध फोन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। फाइनेंशियल फ्रॉड होते ही 1930 पर तत्काल सूचना दें और संबंधित बैंक को भी सूचित करें। ट्रांजैक्शन आईडी यूटीआर स्क्रीनशॉट मोबाइल नंबर, यूआरएल ई-मेल, व्हाट्सएप, टेलीग्राम चैट एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें।
शिकायत www.cybercrime.gov.in और http://www.cybercrime.gov.in पर दर्ज करायें।
घबराहट और दबाव में तत्काल किसी खाते में पैसा ट्रांसफर ना करें। साइबर अपराध से संबंधित चैट, स्क्रीनशॉट या अन्य डिजिटल साक्ष्य डिलीट ना करें। आरोपी से स्वयं बातचीत कर समझौता अथवा नेगोसशिएशन करने का प्रयास न करें। घबराहट और दबाव में तत्काल किसी खाते में पैसा ट्रांसफर ना करें। साइबर अपराध से संबंधित चैट, स्क्रीनशॉट या अन्य डिजिटल साक्ष्य डिलीट ना करें। आरोपी से स्वयं बातचीत कर समझौता अथवा नेगोसशिएशन करने का प्रयास न करें। आपके ठगे हुए पैसे वापस दिला देंगे, कहकर पहले पैसा मांगने वाले व्यक्ति पर विश्वास न करें। पुलिस/सीबीआई/ईडी/ बैंक आदि के नाम पर फोन कर किसी खाते में पैसा ट्रांसफर कराने वाले व्यक्ति के दबाव में न आएं। अनजान एपीके एप्लिकेशन डाउनलोड न करें और स्क्रीन शेयरिंग न करें।
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि साइबर ठग हर बार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। इसलिए पुलिस भी तकनीक के साथ अपनी कार्रवाई को लगातार अपडेट कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता सिर्फ ठगों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पीड़ित का पैसा जल्द से जल्द वापस कराना और ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर व अन्य संसाधनों को ब्लाक करना है। साथ ही पूरे साइबर नेटवर्क को चिन्हित कर उसे खत्म करने का काम किया जा रहा है।