बाबा नीम करोली (सोर्स- फोटो नवभारत)
बाबा नीम करोली की 53वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को वृंदावन स्थित नीम करोली आश्रम में आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन, समाधि पूजन और हनुमान जी की आराधना के लिए आश्रम पहुंचे। सुबह से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की कतारें दिखाई दीं। हर ओर बाबा नीम करोली और हनुमान जी के जयकारे गूंजते रहे।नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में महासमाधि ली थी। उनकी पुण्यतिथि पर आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर पुष्प अर्पित कर माथा टेका और अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। बाबा के जीवन और हनुमान भक्ति से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखने के बाद युवाओं में बाबा के प्रति जिज्ञासा और आध्यात्मिक रुचि बढ़ने की बात कई श्रद्धालुओं ने कही। फिल्म देखने के बाद कुछ युवा पहली बार वृंदावन स्थित आश्रम पहुंचे। युवाओं का कहना था कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच बाबा नीम करोली का जीवन प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता का संदेश देता है। फिल्म ने उन्हें बाबा के जीवन के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया और इसी प्रेरणा के चलते वे पहली बार आश्रम पहुंचे। आश्रम परिसर में दिनभर भजन-कीर्तन चलता रहा। भक्त हनुमान जी के भजनों पर झूमते नजर आए। किसी के हाथ में माला थी तो कोई बाबा की समाधि के सामने ध्यान और प्रार्थना में लीन दिखाई दिया। बाबा नीम करोली के परिवार से जुड़े उनके पोते धनंजय शर्मा भी बाबा के जीवन, उनकी साधना और उनसे जुड़ी मान्यताओं पर सार्वजनिक रूप से अपनी बातें रख चुके हैं। उन्होंने बाबा से जुड़े प्रसंगों के साथ ‘हनुमान अंश’ फिल्म के संदर्भ में भी बातचीत की है।पुण्यतिथि पर आश्रम में उमड़ा जनसैलाब इस बात का दृश्य प्रमाण रहा कि बाबा नीम करोली की भक्ति और उनके सेवा-प्रेम के संदेश का प्रभाव आज भी श्रद्धालुओं के बीच बना हुआ है। विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी ने सनातन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ाव की एक नई तस्वीर पेश की। बाबा के दरबार में पहुंचे भक्त भजन, दर्शन और प्रसाद के साथ प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता का संदेश लेकर लौटे।