Mathura Cyber Security Workshop: तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के बीच आमजन को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को मथुरा में वृहद साइबर सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। डेम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों, पुलिसकर्मियों, छात्र-छात्राओं समेत विभिन्न वर्गों के एक हजार से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन आगरा एस.के. भगत ने की। कार्यक्रम में पुलिस उपमहानिरीक्षक आगरा परिक्षेत्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों की जानकारी देने के साथ-साथ उनसे बचाव के लिए अपनाए जाने वाले सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश साइबर मुख्यालय से आमंत्रित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी बैंकिंग और निजी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी के नाम पर धोखाधड़ी, डिजिटल लेनदेन से जुड़ी ठगी और अन्य साइबर अपराधों से बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।
डॉ. रक्षित टंडन ने लोगों को डिजिटल लेनदेन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई एप डाउनलोड नहीं करना चाहिए और न ही अनजान लिंक पर क्लिक करना चाहिए। बैंक, एटीएम, यूपीआई या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से संबंधित गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
कार्यशाला में जनपद न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, एसपीओ, सभी थानों के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए। इसके अलावा व्यापार मंडल, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य, समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की।
कार्यशाला के दौरान साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगी होने पर पीड़ित को घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देनी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और ठगी गई रकम को रोकने के प्रयास किए जा सकें।
अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि वे ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी, यूपीआई पिन और बैंक संबंधी गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज को लेकर सतर्कता बरतें।
कार्यशाला में एक हजार से अधिक लोगों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता और सावधानी ही ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है।