जलभराव के बीच तिरपाल लगाकर हुआ अंतिम संस्कार (फोटो नवभारत) 
मथुरा

मथुरा में जलभराव के बीच तिरपाल लगाकर हुआ अंतिम संस्कार, मुडेशी गांव के मोक्ष धाम की बदहाली पर फिर उठे सवाल

Mathura News:थाना हाईवे क्षेत्र के मुडेशी गांव में जलभराव और तेज बारिश के बीच तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मोक्ष धाम की बदहाल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं

स्निग्धा श्रीवास्तव

Mathura Moksha Dham (Cremation Ground) News: मथुरा के थाना हाईवे क्षेत्र के वार्ड नंबर-11 स्थित गांव मुडेशी में बारिश और जलभराव के बीच एक बार फिर अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव निवासी 40 वर्षीय अमर सिंह का निधन हो गया। गुरुवार को उनकी शवयात्रा जलभराव से भरे रास्तों के बीच निकाली गई और मोक्ष धाम में तेज बारिश के कारण तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अंतिम संस्कार के दौरान चारों ओर पानी भरा दिखाई दे रहा है, जबकि परिजन और ग्रामीण बारिश के बीच तिरपाल की सहायता से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करते नजर आ रहे हैं। इस दृश्य ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

पहले भी जलभराव के कारण तिरपाल लगाकर हुआ था अंतिम संस्कार

ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। लगभग एक वर्ष पहले भी इसी गांव में एक महिला का अंतिम संस्कार जलभराव के कारण तिरपाल लगाकर करना पड़ा था। उस समय भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और मोक्ष धाम की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन पर सवाल उठे थे। इसके बावजूद आज तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

मोक्ष धामों के विकास के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार द्वारा मोक्ष धामों के विकास के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन गांवों और कॉलोनियों के अधिकांश मोक्ष धामों में विकास कार्य धरातल पर दिखाई नहीं देते। बारिश के दौरान जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया भी कठिन परिस्थितियों में करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मुडेशी सहित क्षेत्र के सभी मोक्ष धामों का जल्द विकास कराया जाए। पक्के रास्ते, जल निकासी, शेड और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार ऐसी विषम परिस्थितियों में न करना पड़े। इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं और मोक्ष धामों के विकास कार्यों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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