Chhata Sugar Mill Women Protest Mathura: छाता शुगर मिल को शुरू कराने और किसानों की मांगों को लेकर पिछले करीब 45 दिनों से चल रहे आंदोलन में सोमवार को महिलाओं की भूमिका सबसे खास नजर आई। जिस समय पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में धरना स्थल से टेंट और तख्त हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, उस समय बड़ी संख्या में महिलाएं भी आंदोलन स्थल पर मौजूद रहीं। महिलाओं ने विरोध के बीच भजन-कीर्तन कर अपनी बात रखी और धरना स्थल का माहौल आध्यात्मिक होने के साथ-साथ आंदोलनकारी तेवरों से भी भर दिया।
किसानों के आंदोलन में आमतौर पर पुरुषों की बड़ी भागीदारी देखने को मिलती है, लेकिन छाता शुगर मिल के आंदोलन में महिलाओं की मौजूदगी ने इसे अलग पहचान दी है। महिलाएं न केवल धरना स्थल पर पहुंच रही हैं, बल्कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
सोमवार को जब पुलिस और पीएसी की बड़ी संख्या धरना स्थल पर पहुंची और आंदोलन समाप्त कराने की कार्रवाई शुरू हुई, तब महिलाओं ने भी मौके से हटने के बजाय अपनी मौजूदगी बनाए रखी। पुलिस द्वारा टेंट और तख्त हटाए जाने के दौरान महिलाओं की भीड़ मौके पर मौजूद रही।
इसी दौरान महिलाओं की ओर से भजन गाए गए। आंदोलन स्थल पर महिलाएं भजन-कीर्तन करती नजर आईं। उनका कहना था कि किसानों की मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन में वे भी पीछे नहीं हटेंगी।
आंदोलन के दौरान रात में भी महिलाओं की सक्रियता बनी रही। महिलाओं ने धरना स्थल पर भजन-कीर्तन किया। इसी दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर महिलाओं के साथ कथित अभद्रता और बर्बरता के आरोप भी लगाए गए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्वक भजन-कीर्तन कर रही महिलाओं के साथ भी पुलिस ने सख्ती दिखाई।
हालांकि इन आरोपों पर मथुरा पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की कार्रवाई और महिलाओं के आरोपों के बीच तस्वीर स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होगा।
छाता शुगर मिल का आंदोलन केवल किसानों की आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रह गया है। परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी और किसानों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे में महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को भावनात्मक आधार भी दिया है।
धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं का कहना है कि किसान परिवार की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर भी होती है। खेत, घर और परिवार की जरूरतें किसानों की आय से जुड़ी हैं। ऐसे में चीनी मिल के भविष्य का सवाल केवल किसान पुरुषों का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का मुद्दा है।
इसी सोच के साथ महिलाएं धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं।
सोमवार को धरना स्थल का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। एक तरफ पुलिस और पीएसी की मौजूदगी थी, दूसरी तरफ महिलाएं भजन गा रही थीं। आंदोलन और धार्मिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का यह मेल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
महिलाओं ने भजनों के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया। उनके हाथों में आंदोलन का समर्थन और जुबान पर भजन दिखाई दिए। पुलिस कार्रवाई के बीच भी महिलाओं ने धरना स्थल पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
छाता शुगर मिल आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी यह संकेत देती है कि अब किसान आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका केवल समर्थन तक सीमित नहीं है। वे धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं और किसानों की मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रही हैं।
सोमवार की कार्रवाई के दौरान भी महिलाओं की बड़ी मौजूदगी ने प्रशासन के सामने एक अलग चुनौती पेश की। पुलिस के सामने जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वहीं आंदोलनकारी महिलाओं की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना दिया।
छाता शुगर मिल पर जारी आंदोलन में आने वाले दिनों में महिलाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रहती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल इतना साफ है कि आंदोलन की तस्वीर में अब किसान परिवारों की महिलाओं की मौजूदगी भी प्रमुखता से दिखाई देने लगी है।