AAP Sanjay Singh: राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े जमीन खरीद मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को एसआईटी की ओर से क्लीन चिट दिए जाने पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट में राय और मिश्रा को क्लीन चिट कैसे मिल सकती है।
संजय सिंह ने कहा कि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। सिंह ने कहा कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर नाराजगी जताई तो उसी दिन अखबारों में आरोपियों को क्लीन चिट दिए जाने की खबरें प्रकाशित करा दी गई, उन्होंने पूर्व में गठित एसआईटी की रिपोर्ट का वह पन्ना सार्वजनिक किया, जिसे अब तक दबाया गया था।
साथ ही इसे आरोपियों को बचाने के लिए सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने वर्तमान एसआईटी अध्यक्ष किसन एस। को पत्र लिखा है, जिसमें 26 अहम दस्तावेज सौंपने के लिए समय मांगा गया है। विश्वास पंत की एसआईटी रिपोर्ट में पन्ना नंबर 6 गायब कर दिया गया था, जो अब मिल गया है।
इस पन्ने में साफ लिखा है कि अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ तय नियमों को शिथिल किया, जिसके चलते मंदिर में चोरी और गबन की स्थितियां उत्पन्न हुई। जब रिपोर्ट सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदार मानती है, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर प्रसारित बिना हस्ताक्षर वाले एक कथित पत्र को मनगढंत बताते हुए इसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाए है। यह पत्र कथित तौर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के नाम से जारी बताया जा रहा है।
मिश्र ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा है और जब तक मूल पत्र उनके सामने नहीं आता, वह इसे मनगढ़ंत मानते हैं। सोशल मीडिया पर यह कथित पत्र बृहस्पतिवार को सामने आया था और इस पर 18 अगस्त की तारीख दर्ज है। पत्र में दावा किया गया है कि मिश्र की सलाह पर मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो का चयन किया गया तथा निर्माण समिति में उनकी पसंद के लोगों को शामिल किया गया।