अनामिका और नीलेश, (डिजाइन फोटो/ नवभारत) 
लखनऊ

Lucknow Fire: जिस ऑफिस में एक-दूसरे को चुना हमसफर, वहीं मिली मौत; लखनऊ अग्निकांड की एक दर्दनाक दास्तां

Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को लगी भीषण आग ने एक पल में 15 जिंदगियां जलाकर राख कर दिया। अनामिका और नीलेश भी इस हादसे का शिकार हो गए, जो अपनी शादी की तैयारियां कर रहे थे।

मनोज आर्या

Lucknow Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को लगी भीषण आग की चपेट में आने से 15 लोग जलकर राख हो गए। मरने वाले लोगों में एक कपल ऐसा भी था, जिनके परिवार उनकी शादी की प्लानिंग कर रहे थे। पिछले हफ़्ते अनामिका सामंत के माता-पिता कोलकाता से लखनऊ नीलेश कुमार के परिवार से मिलने आए थे, जो उनकी जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत होनी चाहिए थी। इसके बजाय, इस हादसे ने उनकी जिंदगी और साथ में भविष्य को भी जली हुई आग की तरह बना दिया।

नीलेश के भाई अभिषेक कुमार ने कहा कि अनामिका सामंत के माता-पिता हमारे घर आए और मेरे छोटे भाई नीलेश कुमार के साथ उनकी शादी के लिए आशीर्वाद दिया। हम शादी के इंतजाम को फाइनल करने के लिए अगले हफ्ते  कोलकाता जाने की तैयारी कर रहे थे।  उन्होंने आगे बताया कि शादी इस साल नवंबर में प्लान की गई थी।

जॉब के दौरान हुई थी दोनों की मुलाकात

28 वर्षीय नीलेश और 27 वर्षीय अनामिका की मुलाकात हेड हॉपर स्टूडियोज में काम करते समय हुई थी, जो 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम डेवलपमेंट में स्पेशलाइजेशन वाली कंपनी है। कंपनी का स्टूडियो उस बिल्डिंग की दूसरी मंजिल से चलता था जहां आग लगी थी। सालों से, जो एक प्रोफ़ेशनल जान-पहचान के तौर पर शुरू हुआ था, वह एक करीबी रिश्ते में बदल गया। नीलेश करीब तीन साल से स्टूडियो में काम कर रहे थे, और अनामिका भी लगभग उसी समय शामिल हुईं।

नीलेश कुमार और अनामिका सामवंत की तस्वीर, (सोर्स- सोशल मीडिया)

नीलेश के भाई अभिषेक कुमार ने कहा कि हमें कुछ समय पहले उनके रिश्ते के बारे में पता चला और उसके बाद हमारे परिवार ने अनामिका के माता-पिता से बात करने का फैसला किया। हमने उन्हें लखनऊ में अपने घर बुलाया। उनके माता-पिता और भाई समेत उनके परिवार के चार सदस्य कोलकाता से आए थे। उसी दौरान दोनों परिवार शादी के लिए राजी हो गए और अरेंजमेंट लगभग फाइनल हो गए थे।

कैसे मातम में बदला खुशिया का पल?

हजार किलोमीटर से ज्यादा दूर रहने वाले दोनों परिवारों के लिए यह मुलाकात खुशी और उम्मीद का पल थी। लेकिन, इस घटना ने कुछ ही घंटों में उन उम्मीदों को तोड़ दिया, जिससे दोनों परिवार न सिर्फ दो जवान जिंदगियों के जाने का दुख मना रहे थे, बल्कि उस भविष्य का भी दुख मना रहे थे जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। नीलेश, उत्तर प्रदेश बिजली डिपार्टमेंट के रिटायर्ड कर्मचारी शत्रुघ्न लाल और संतोष कुमारी के चार बच्चों में तीसरे थे। नीलेश के परिवार ने कहा कि उन्हें इस हादसे के बारे में तब तक पता नहीं था जब तक उन्हें सोमवार शाम को मॉर्चरी से कॉल नहीं आया। कई और लोगों की तरह उन्होंने भी लखनऊ के अलीगंज की एक बिल्डिंग में लगी आग की न्यूज रिपोर्ट्स देखी थीं। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि उस जगह पर एक कोचिंग सेंटर और एक लाइब्रेरी थी, लेकिन किसी में यह नहीं बताया गया कि उसमें 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम डेवलपमेंट का एक स्टूडियो भी था, जहां नीलेश काम करता था।

मॉर्चरी से कॉल पर मिली मौत की खबर

अभिषेक ने कहा कि हमें आग के बारे में पता था, लेकिन हमने इसे सीरियसली नहीं लिया क्योंकि ऐसा कोई इशारा नहीं था कि नीलेश का ऑफिस उसी बिल्डिंग में था। शाम को उन्हें मॉर्चरी से एक कॉल आया, जिसमें उनकी मौत की खबर दी गई। परिवार वाले हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि नीलेश की बॉडी आसानी से पहचानी जा सकती थी, और ऐसा लग रहा था कि उनकी मौत दम घुटने से हुई।

शादी के लिए राजी था दोनों परिवार

जैसे नीलेश का परिवार इस नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा था, वैसे ही सैकड़ों किलोमीटर दूर कोलकाता में अनामिका के रिश्तेदार भी दुखी थे। उनके परिवार का कोई भी सदस्य लखनऊ नहीं पहुंच पाया। जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए कोलकाता ले जाया गया। अनामिका के छोटे भाई, 24 साल के आकाश सामंत ने नीलेश के परिवार से मिलने के लिए परिवार की हाल की लखनऊ यात्रा को याद किया।

लखनऊ के अलीगंज स्थिल इसी बिल्डिंग में लगी थी आग, (सोर्स- IANS)

आकाश ने बताया कि इससे पहले, हमारे परिवार उनसे कभी नहीं मिले थे। मेरी बहन ने कुछ समय पहले हमारे माता-पिता को नीलेश के बारे में बताया था। मुझे उनके रिश्ते के बारे में लगभग छह महीने से पता था। मैं अपने माता-पिता के साथ लखनऊ गया और हम नीलेश के घर गए।

तीन साल से लखनऊ में रह रही थी अनामिका

अनामिका पिछले तीन सालों से लखनऊ में रह रही थी और एक आर्टिस्ट के तौर पर अपना करियर बना रही थी। दो बच्चों में बड़ी अनामिका के पिता बिश्वनाथ सामंत एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं और उनकी मां सुलेखा सामंत हैं। आकाश ने कहा कि हम नीलेश के परिवार से खुद मिलना चाहते थे, इसीलिए हम लखनऊ गए। हमने उनके साथ समय बिताया। हमें पता नहीं था कि नीलेश का परिवार कोलकाता आने का प्लान बना रहा है।

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