राष्ट्रीय चिकित्सा छात्र संगठन ने मुख्यमंत्री के सामने रखी थीं 11 सूत्रीय मांगें
डॉ. शिवम कृष्णा ने कथित अवैध धर्मांतरण नेटवर्क के सक्रिय होने का किया दावा
STF रिपोर्ट में कई डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के नामों का उल्लेख
STF Report Questions Raised: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपों के मामले में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट आने के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिसंबर 2025 में सामने आए इस मामले को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा छात्र संगठन ने शुरुआत से ही विरोध प्रदर्शन किया था। अब करीब एक साल बाद एसटीएफ की रिपोर्ट में कई लोगों के नाम सामने आने के बाद संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्रीय चिकित्सा छात्र संगठन के महानगर संयोजक डॉ. शिवम कृष्णा ने नवभारत से एक्सक्लूसिव बातचीत में आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि जिस समय आरोप सामने आए थे, उसी समय तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की।
डॉ. शिवम कृष्णा ने बताया कि दिसंबर 2025 में घटना सामने आने के बाद नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन के बैनर तले विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया था। धीरे-धीरे यह आंदोलन विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर लखनऊ में बड़े स्तर पर पहुंचा। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री के सामने 11 सूत्रीय मांगें भी रखी गई थीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग पूरे मामले की एसटीएफ से जांच कराने की थी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन लोगों के खिलाफ संगठन ने आरोप लगाए थे, अब एसटीएफ की रिपोर्ट में भी उन्हीं से जुड़े नाम सामने आ रहे हैं। डॉ. शिवम कृष्णा के मुताबिक, संगठन लगातार इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रशासन के अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा सकता था।
डॉ. शिवम कृष्णा ने बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश में पिछले 10 से 15 वर्षों से कथित अवैध धर्मांतरण और मतांतरण से जुड़े नेटवर्क के सक्रिय होने का दावा किया। उन्होंने इसे एक बड़े सिंडिकेट से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए देश को तोड़ने की साजिश की जा रही है।
इस बीच एसटीएफ की सात पेज की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद केजीएमयू में भी हलचल बढ़ गई है। रिपोर्ट में सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा में मेडिकल छात्रों के एक समूह का जिक्र किया गया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 'इस्लामिक मेडिकोज' नाम से एक किताब प्रकाशित हुई थी, जिसमें वर्ष 2012 से 2016 बैच तक के मुस्लिम मेडिकल छात्रों का विवरण दर्ज था।
रिपोर्ट में रमीज, रिजवान मलिक, अदनान अंसारी और सैम अनीस के आपसी संपर्क का भी उल्लेख किया गया है। इसमें सैम अनीस पर पीड़ित महिलाओं से बातचीत के दौरान 19 युवतियों के साथ दुष्कर्म करने का दावा करने का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में अन्य महिलाओं के संपर्क में होने की जानकारी की भी जांच की जा रही है।
एसटीएफ की रिपोर्ट में कई डॉक्टरों के नाम सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन भी आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ डॉक्टर वर्तमान में केजीएमयू से बाहर दूसरे बड़े संस्थानों में भी अहम पदों पर तैनात हैं।