बिना सूचना दिए महीनों रहा गायब (सोर्स- सांकेतिक फोटो)
कानपुर

कैसे मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ; जब अधिकारी ही था इतना लापरवाह, बिना सूचना दिए महीनों रहा गायब.. निलंबित

Kanpur Shivam Sagar Suspended: कानपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर को बिना स्वीकृत अवकाश करीब तीन महीने तक अनुपस्थित रहने और शासन के नोटिस का जवाब न देने पर निलंबित किया गया है।

अभिनव श्रीवास्तव, स्निग्धा श्रीवास्तव

Kanpur District Social Welfare Officer: विभागीय जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना और मंत्री के प्रोटोकॉल का पालन न करना जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर को भारी पड़ गया। स्वीकृत चिकित्सीय अवकाश खत्म होने के बाद करीब तीन महीने तक बिना अनुमति कार्यालय से नदारद रहने, विभागीय मंत्री असीम अरुण के दौरे में अनुपस्थित रहने और शासन के स्पष्टीकरण का जवाब न देने के मामले में उन्हें प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव ने निलंबित कर दिया है।शिवम सागर को निदेशालय में संबद्ध कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

दिसंबर 2025 में जिले में हुई थी तैनाती

निलंबित किए गए समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर को पहली बार दिसंबर 2025 में कानपुर जिले में तैनात किया गया था।कानपुर में तैनाती से पहले वह निदेशालय में संबद्ध रहकर कार्य कर रहे थे। कानपुर में तैनाती के बाद से ही जिला समाज कल्याण अधिकारी का मन काम में नहीं लग रहा था जिसके चलते कई सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल पा रहा था।

सिर्फ आवेदन किया और हो गया गायब

निलंबित किए गए जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 19 अप्रैल से 1 में 2026 तक चिकित्सीय अवकाश के लिए मानव संपदा पोर्टल के जरिए आवेदन किया था लेकिन इसके लिए ना तो तत्कालीन सीडीओ दीक्षा जैन ने स्वीकृति दी और न ही जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की तरफ से स्वीकृति प्रदान की गई थी लेकिन इसके बावजूद भी जिला समाज कल्याण अधिकारी अवकाश पर चला गया और तय समय सीमा के बाद भी वह कार्यालय नहीं लौटा।

लाभार्थियों के लिए दूसरे अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देकर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा था पत्र

जन समस्याओं को देखते हुए जिलाधिकारी को जिला समाज कल्याण अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी वीरपाल को सौंपना पड़ा। कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा, लाभार्थियों से जुड़े काम और विभाग के निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारी की गैर मौजूदगी में योजनाओं की प्रगति काफी खराब हो गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्र भेज दिया था।

कार्रवाई के डर से आया वापस लेकिन मंत्री के कार्यक्रम में नहीं पहुंचा

कार्रवाई के डर से जुलाई में अधिकारी ने फिर से कार्यभार संभाल लिया। इसके बाद शासन ने 28 जुलाई को बिना स्वीकृत अवकाश लेकर गायब रहने पर नोटिस देकर जवाब-तलब किया लेकिन अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद 16 अगस्त को समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के दौरे के दौरान भी अनुपस्थित रहे। जबकि अधिकारी को पहले से सूचना दी गई थी। इसके बाद भी उनकी गैरमौजूदगी को सरकारी दायित्वों के प्रति गंभीर उदासीनता और अनुशासनहीनता मानते हुए प्रमुख सचिव ने निलंबित कर दिया।

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