रावण  (सोर्स- सोशल मीडिया)
उत्तर प्रदेश

झांसी में दो पीढ़ियों से रावण के पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार, 25 साल से इस परंपरा से जुड़ी हैं राबिया बानो

Jhansi Dussehra 2026: झांसी में राबिया बानो और उनका मुस्लिम परिवार दशहरे के लिए 55 फीट का रावण और मेघनाथ-कुंभकरण के 45 फीट के पुतले बना रहा है। परिवार दो पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहा है।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Muslim Family Making Ravana Effigies: बुंदेलखंड की गंगा-जमुनी तहजीब की एक खूबसूरत तस्वीर झांसी के सदर बाजार में देखने को मिल रही है। यहां दशहरे पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा, लेकिन इन पुतलों को तैयार करने में एक मुस्लिम परिवार दिन-रात जुटा हुआ है। जालौन के कोंच की रहने वाली राबिया बानो अपने पति और बच्चों के साथ पिछले कई वर्षों से इस काम में लगी हैं। परिवार की दो पीढ़ियां इस हुनर को आगे बढ़ा रही हैं। राबिया की बेटियां पढ़ाई के साथ माता-पिता का हाथ बंटाती हैं और इस पारंपरिक कला को भी सीख रही हैं।

98 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी है परिवार की रोजी-रोटी

झांसी के सदर बाजार में दशहरे पर रावण दहन का आयोजन लंबे समय से होता आ रहा है। इस बार 20 अक्टूबर 2026 को रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा। करीब 98 साल से चली आ रही इस परंपरा के पीछे एक ऐसे परिवार की मेहनत भी शामिल है, जो पीढ़ियों से इन पुतलों को बनाने का काम कर रहा है।

जालौन जिले के कोंच की रहने वाली राबिया बानो अपने परिवार के साथ पुतलों के निर्माण में जुटी हैं। उनके परिवार को इस काम का करीब 25 साल का अनुभव है। राबिया बताती हैं कि उनके ससुर पहले पुतले बनाने का काम करते थे। वह उनके साथ काम पर जाती थीं और धीरे-धीरे उन्होंने भी यह हुनर सीख लिया। अब वह अपने पति और बच्चों के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।

55 फीट का रावण, 45-45 फीट के होंगे मेघनाथ और कुंभकरण

इस साल दशहरे के लिए परिवार तीन विशाल पुतले तैयार कर रहा है। इनमें रावण का पुतला 55 फीट ऊंचा होगा, जबकि मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों की ऊंचाई 45-45 फीट रखी गई है। इन पुतलों को तैयार करने में करीब डेढ़ महीने का समय लग जाता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर दिन-रात मेहनत करते हैं, तब जाकर पुतले तैयार हो पाते हैं।

राबिया बताती हैं कि उनका परिवार पिछले छह साल से झांसी में आकर पुतले बनाने का काम कर रहा है। दशहरे के आयोजन के बाद परिवार दूसरे कामों में जुट जाता है, ताकि घर का खर्च चलाया जा सके।

एक लाख 70 हजार रुपये में मिला पुतले बनाने का ठेका

पुतले बनाने का ठेका लेकर काम कर रहे यासीन बताते हैं कि उनके परिवार में भी यह काम दो पीढ़ियों से किया जा रहा है। पहले उनके पिता पुतले बनाते थे और उन्होंने पिता के साथ रहकर ही यह कला सीखी। उनके फूफा भी इसी काम से जुड़े रहे हैं। इस बार तीनों पुतले बनाने का ठेका एक लाख 70 हजार रुपये में मिला है।

यासीन के मुताबिक, पुतले बनाने में करीब 40 दिन तक पूरा परिवार दिन-रात जुटा रहता है। इतनी मेहनत के बाद भी यदि इस काम का मेहनताना नहीं बढ़ता है, तो भविष्य में इसे जारी रखना मुश्किल होगा। वह कहते हैं कि दशहरे के अलावा परिवार मकान बनाने का ठेका लेकर भी काम करता है। उनके पिता ने उन्हें पुतले बनाना सिखाने के साथ मकान बनाने का काम भी सिखाया था। इसी से परिवार का भरण-पोषण होता है।

पढ़ाई के साथ माता-पिता का हाथ बंटा रहीं बेटियां

राबिया बानो की बड़ी बेटी आरजू मंसूरी कक्षा 11 में पढ़ती हैं। आरजू बताती हैं कि वह बचपन से अपने माता-पिता को रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाते देखती आ रही हैं। अब वह भी इस काम में काफी कुछ सीख चुकी हैं। इस बार वह करीब डेढ़ महीने की छुट्टी लेकर परिवार की मदद करने आई हैं।

वहीं, छोटी बेटी नेहा मंसूरी भी हर साल अपने माता-पिता के साथ पुतले बनाने में सहयोग करती हैं। नेहा बताती हैं कि जब पुतले बनाने का काम शुरू होता है, तो वह पढ़ाई से छुट्टी लेकर परिवार की मदद करने आ जाती हैं। काम पूरा होने के बाद फिर अपनी पढ़ाई में जुट जाती हैं। उन्होंने भी अपने दादा और माता-पिता को देखकर यह हुनर सीखा है।

मेहनत, परंपरा और भाईचारे की मिसाल

झांसी के सदर बाजार में दशहरे के लिए तैयार हो रहे ये विशाल पुतले केवल एक धार्मिक आयोजन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे कई दिनों की मेहनत, परिवार की आजीविका और पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर की कहानी भी छिपी है। एक ओर परिवार अपनी बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए मेहनत कर रहा है, तो दूसरी ओर पारंपरिक कला को भी जीवित रखे हुए है।

राबिया बानो और यासीन का परिवार दिखाता है कि हुनर और मेहनत की कोई सीमा नहीं होती। दशहरे पर जब रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन होगा, तब उस आयोजन के पीछे इस परिवार की मेहनत और बुंदेलखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत की कहानी भी मौजूद होगी।

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