समरा नाज़ (सोर्स- फोटो नवभारत)
उत्तर प्रदेश

कच्ची सड़क और गड्ढों से परेशान बच्ची; कलेक्ट्रेट पहुंचकर उठाई बदहाल सड़क की आवाज, DM ने दिया जांच का भरोसा

Mau District Magistrate: मऊ में कच्ची सड़क, कीचड़ और गड्ढों की समस्या से परेशान 7 साल की कक्षा एक की छात्रा समरा नाज़ ने अपने मोहल्ले की बदहाल सड़क को लेकर जिलाधिकारी आनंद वर्धन को ज्ञापन सौंपा।

धर्मेंद्र कुमार चौबे, स्निग्धा श्रीवास्तव

Mau Road Repair Demand: मऊ में महज सात साल की एक नन्हीं बच्ची ने अपने बुलंद हौसले और बेबाक अंदाज से प्रशासन का ध्यान अपने मोहल्ले की बदहाल सड़क की ओर खींचा है। कक्षा एक में पढ़ने वाली समरा नाज़ सोमवार को अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची और जिलाधिकारी आनंद वर्धन को ज्ञापन सौंपकर वार्ड संख्या 17 की कच्ची और जर्जर सड़क की मरम्मत कराने की मांग की।

समरा नाज़ ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि उसके मोहल्ले का रास्ता लंबे समय से कच्चा, कीचड़युक्त और गड्ढों से भरा हुआ है। इसी रास्ते से मोहल्ले के लोगों के साथ-साथ बच्चों को भी प्रतिदिन स्कूल आने-जाने के लिए गुजरना पड़ता है। खराब सड़क के कारण आवागमन में भारी परेशानी होती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वीडियो

दरअसल, कुछ दिन पहले समरा नाज़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में वह अपने मोहल्ले की बदहाल सड़क, कीचड़ और गड्ढों को दिखाते हुए नगर पालिका की व्यवस्था पर सवाल उठाती नजर आई थी। नन्हीं बच्ची की बेबाकी और अपने क्षेत्र की समस्या को लेकर उसकी चिंता ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया था।

डीएम ने जांच के लिए टीम भेजने का दिया भरोसा

सोमवार को समरा ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए सीधे प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक दी। अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची समरा ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द सड़क निर्माण या मरम्मत की मांग की।

डीएम ने जांच के लिए टीम भेजने का दिया भरोसा

जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बताया कि वार्ड संख्या 17 निवासी कक्षा एक की छात्रा उनके पास ज्ञापन लेकर आई थी। बच्ची ने बताया कि उसके घर और स्कूल आने-जाने के रास्ते में कच्ची सड़क है, जिसकी हालत काफी खराब है और मरम्मत की जरूरत है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मामले की जांच के लिए प्रशासनिक टीम को मौके पर भेजा जाएगा। टीम द्वारा स्थिति का निरीक्षण करने के बाद नियमानुसार जो भी कार्य संभव होगा, उसके आधार पर समस्या का समाधान कराया जाएगा।

महज सात वर्ष की उम्र में अपने मोहल्ले की समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचने वाली समरा नाज़ अब चर्चा का विषय बन गई है। उसकी पहल ने यह साबित कर दिया कि समस्याओं के समाधान के लिए उम्र नहीं, बल्कि अपनी बात को सही मंच तक पहुंचाने का साहस और जज्बा जरूरी होता है।

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