बुलंदशहर कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
उत्तर प्रदेश

बुलंदशहर में चौंकाने वाला मामला; महिला ने नाबालिग भतीजे पर लगाया दुष्कर्म का आरोप, जांच में खुली चाची की पोल

Bulandshahr Crime: बुलंदशहर के पहासू में पुलिस ने नाबालिग पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने वाली महिला को गिरफ्तार किया है। साइबर और फॉरेंसिक जांच में महिला पर 5 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप लगे।

कपिल सोनी, स्निग्धा श्रीवास्तव

Bulandshahr POCSO Case: पहासू थानाक्षेत्र में पुलिस ने एक मामले का खुलासा किया है। एक महिला ने अपने नाबालिग भतीजे पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाया था। पुलिस की जांच में पता चला कि, महिला ने ही भतीजे का यौन उत्पीड़न किया, उसे ब्लैकमेल किया और रंगदारी मांगी थी। महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पॉक्सो अधिनियम के तहत जिले में किसी महिला के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है।

यह मामला तीन महीने पहले शुरू हुआ था। पहासू निवासी एक राजमिस्त्री ने थाने में शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि उसके 16 साल के दूर के भतीजे ने उसकी पत्नी के साथ तमंचे के बल पर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना ली। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की।

महिला ने नाबालिग भतीजे पर लगाया झूठा आरोप

पति से अलग पूछताछ में एक अहम बात सामने आई। पति ने बताया कि उसने अपनी पत्नी के फोन में आपत्तिजनक वीडियो देखे थे। पति के सवालों से बचने और खुद को बेकसूर साबित करने के लिए महिला ने नाबालिग भतीजे पर झूठा आरोप लगा दिया था।

पुलिस ने साइबर सेल की मदद ली। दोनों के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले गए। डिजिटल जांच में साफ हुआ कि वीडियो किशोर ने नहीं, बल्कि महिला ने खुद बनाई थी।

महिला ने वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर नाबालिग से 5 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। लोकलाज के डर से किशोर ने उसे कुछ नकदी भी दी थी। इलेक्ट्रॉनिक सबूत सामने आने पर महिला ने अपना अपराध कबूल कर लिया।

पॉक्सो एक्ट, रंगदारी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज

सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, रंगदारी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज किया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत ने आरोपी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) वरुण कौशिक और एसपी देहात अंतरिक्ष जैन ने बताया कि पॉक्सो कानून जेंडर-न्यूट्रल है। इसमें 18 साल से कम उम्र के बालक या बालिका, किसी के भी साथ अपराध होने पर समान कार्रवाई का प्रावधान है। निष्पक्ष जांच के जरिए निर्दोष किशोर को न्याय दिलाने के लिए पुलिस टीम की तारीफ की जा रही है।

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