सीएम योगी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन।  
उत्तर प्रदेश

यूपी में भाजपा करा रही सर्वे, इसी आधार पर नेताओं को मिलेगा टिकट, निगेटिव रिपोर्ट आई तो नहीं बनाएगी उम्मीदवार

UP Election News : यूपी में भाजपा ने विधानसभा चुनाव की जमीनी तैयारी शुरू कर दी है। कैंडिडेट सिलेक्शन के लिए पहले फेज का सर्वे शुरू होने जा रहा। नेशन विद नमो को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

रंजन कुमार

UP Vidhan Sabha Election News: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में 14 महीने का वक्त है, लेकिन भाजपा ने चिर-परिचित कार्यशैली के अनुरूप चुनावी चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है। दिल्ली, हरियाणा और बिहार की जीत से उत्साहित भाजपा का पूरा ध्यान यूपी में जीत की हैट्रिक लगाने पर है। भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए पहले चरण का जमीनी सर्वे शुरू कर दिया है। इसकी जिम्मेदारी नेशन विद नमो को सौंपी गई है। यह वही टीम है, जो लंबे समय से भाजपा के लिए चुनावी प्रबंधन का काम देख रही। एजेंसी के सर्वेयर अब यूपी की गलियों, चौराहों और चाय की दुकानों पर दिखने लगे हैं।

भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए पहले चरण का जमीनी सर्वे शुरू कर दिया है। इसकी जिम्मेदारी 'नेशन विद नमो' (पुराना नाम- एबीएम) को सौंपी गई है। यह वही टीम है जो लंबे समय से भाजपा के लिए चुनावी प्रबंधन का काम देख रही है। एजेंसी के सर्वेयर अब यूपी की गलियों, चौराहों और चाय की दुकानों पर नजर आने लगे हैं।

जनता की नब्ज और रिपोर्ट कार्ड

यह सर्वे सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि बेहद प्रोफेशनल है। इसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के छात्र और आईआईएम-आईआईटी जैसे संस्थानों के प्रोफेशनल शामिल हैं। सर्वे के मुख्य बिंदू हैं-

विधायक की छवि: क्या मौजूदा विधायक जनता के बीच लोकप्रिय है या उसकी कार्यशैली को लेकर नाराजगी है?

वैकल्पिक चेहरा: विधायक का टिकट कटता है, तो दूसरा सबसे मजबूत दावेदार कौन हो सकता है?

संगठन का तालमेल: सर्वेयर केवल जनता ही नहीं, बल्कि आरएसएस के स्वयंसेवकों और जिला स्तर के पदाधिकारियों से भी गुप्त फीडबैक ले रहे हैं।

सोशल इंजीनियरिंग: क्षेत्र के जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों पर जनता की राय क्या है, इसकी बारीकी से जांच हो रही है।

2022 का फॉर्मूला

भाजपा का इतिहास रहा है कि वह रिपोर्ट कार्ड खराब होने पर कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकती। 2022 के चुनाव में भी जार्विस और एबीएम की रिपोर्ट के आधार पर 120 से अधिक विधायकों के टिकट काटे गए थे। इस बार भी संकेत साफ हैं, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आएगी, उनका पत्ता कटना तय है। पार्टी ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों से सर्वे कराने का मन बनाया है। इसका मकसद यह है कि किसी एक एजेंसी की रिपोर्ट एकतरफा या पक्षपाती न हो।

क्यों खास है यह तैयारी?

उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। 2017 और 2022 की जीत के बाद 2027 में जीत दर्ज करना पार्टी के लिए साख का सवाल है। एक तरफ जहां कार्यकर्ता मतदाता सूची को दुरुस्त करने (SIR) में लगे हैं। दूसरी तरफ ये प्रोफेशनल सर्वेयर पर्दे के पीछे से प्रत्याशियों की किस्मत लिख रहे हैं। 2014 तक जो चुनावी प्रबंधन प्रशांत किशोर संभालते थे, उसी टीम के सदस्य सुनील सिंह ने ए बिलियन माइंड (ABM) बनाई थी, जो अब नेशन विद नमो के रूप में भाजपा की रणनीति का मुख्य हिस्सा है।

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