Madrasa Education Board on Biometric Attendance: उत्तर प्रदेश में अनुदानित मदरसों के संचालन और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मदरसा शिक्षा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब सभी अनुदानित मदरसों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी।
बोर्ड ने जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों (डीएमओ) को निर्देश दिया है कि जिन मदरसों में अभी तक बायोमेट्रिक सिस्टम स्थापित नहीं हुआ है, वहां उनकी निगरानी में जल्द से जल्द यह व्यवस्था लागू कराई जाए। साथ ही, सिस्टम के नियमित संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी भी डीएमओ की होगी।
निर्देश में बताया गया है कि शासन ने 23 मई को ही मदरसों में बायोमेट्रिक हाजिरी लागू करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन कई संस्थानों में इसका पूर्ण पालन नहीं हो पाया है। इसके कारण छात्रों और शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन नहीं हो रहा है। अब सरकार बायोमेट्रिक उपस्थिति के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है। शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी अटेंडेंस रिकॉर्ड को आधार बनाया जाएगा।
प्रदेश में कुल 561 मदरसे ऐसे हैं जिन्हें सरकार की ओर से अनुदान मिलता है। इन मदरसों में वर्तमान में 2.31 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, इन मदरसों में 9889 शिक्षक और 8367 शिक्षणेतर कर्मचारी कार्यरत हैं। बड़ी संख्या में स्टाफ होने के बावजूद, पिछले कई वर्षों से उपस्थिति और सेवा शर्तों की जांच नहीं हो पाई थी।
जानकारी के मुताबिक साल 2007 से 2017 तक कई शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों का सत्यापन तक नहीं हुआ। नतीजतन कई लोगों को बिना जांच के वेतन वृद्धि और पेंशन स्वीकृत होती रही। इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए अब शासन ने सभी जिलों में जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।
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बता दें कि, मदरसा पोर्टल पर बच्चों का नाम, अभिभावक का नाम, जन्मतिथि, कक्षा, पता और मोबाइल नंबर दर्ज है। इससे छात्रों की वास्तविक संख्या और पढ़ाई की स्थिति पर निगरानी करना आसान हो गया है।