Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो पैन कार्ड मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे, पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को राहत दी है। अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत देने की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया। दोनों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा को निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग करते हुए क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर की थी।
आपको बता दें, कि पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और अब्दुल्ला आजम के पास दो पैन कार्ड होने के मामले में, रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने नवंबर 2025 में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, दोनों को 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 50,000-50,000 रुपये के जुर्माने लगाया था।
दो पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से ही आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर जेल में सजा काट रहे हैं। MP-MLA सेशन कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई थीं।
आजम खान का नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले से भी जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया है।
ED के अनुसार, इन संपत्तियों की कीमत 426.46 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान तथा अन्य लोगों से जुड़े एक मामले में की गई है।
ED का कहना है कि जब्त की गई संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपये है। रामपुर के सिंघानखेड़ा गांव में जौहर यूनिवर्सिटी, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी। वे ही इसे नियंत्रित करते हैं और यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं।
ED ने यह जांच रामपुर के अजीमनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज 26 FIR के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में आरोप है कि किसानों की कृषि भूमि को जबरदस्ती हथिया लिया गया और उसका इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के लिए किया गया।
यह मामला बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत पर शुरू हुआ था। यह मामला 2019 में सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। 17 नवंबर 2025 को अदालत ने आजम खान और उनके बेटे दोनों को दोषी ठहराया था।
दोनों को सात साल की जेल की सजा सुनाई और उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। 19 नवंबर 2025 को आजम खान ने इस सजा के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसे 20 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया गया था।