अयोध्या राम मंदिर सौजन्य-IANS
अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर में दर्शन पास की बुकिंग बंद; चंदा चोरी उजागर करने वाले पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत

Ram Mandir Donation Case: सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चंदा मामले की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय का डिजिटल डेटा मांगने वाला UP पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया।

प्रिया जैस

Highlights:

  • श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सामान्य दर्शन पास की सुविधा बंद कर दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चंदा मामले की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को राहत दी है।

  • पुलिस IT एक्ट की आड़ में किसी आरोपी या पत्रकार के पुराने डिजिटल डेटा नहीं मांग सकती।

Ayodhya Ram Mandir Darshan Pass: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सामान्य दर्शन पास की सुविधा बंद कर दी है और अपनी आधिकारिक वेबसाइट से इसकी ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प भी हटा दिया है।

हालांकि, सुगम दर्शन और आरती पास की ऑनलाइन बुकिंग पहले की तरह जारी रहेगी। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने मई के अंत में ही मंदिर परिसर के पूरक और सप्तर्षि मंदिरों में दर्शन के लिए पास की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी।

यूपी पुलिस को लगा झटका

अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का खुलासा करने वाले लोगों को और उनके सहयोगियों का पता लगाने की उत्तर प्रदेश पुलिस की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चंदा चोरी को उजागर करने वाले पत्रकार के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस के आदेश को रद्द किया

शीर्ष अदालत ने पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मांगे गए पुराने डेटा को 'डिजिटल जासूसी' और निजता के अधिकार पर हमला करार देते हुए गाजियाबाद पुलिस के आदेश को रद्द कर दिया है। अधिवक्ता प्रदीप राय ने पीठ को बताया कि पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

आरोप लगाया गया कि इस खोजी रिपोर्ट के गुप्त स्रोतों का पता लगाने और पत्रकार को प्रताड़ित करने की नीयत से 18 अगस्त को रोड रेज की एक मनगढंत एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने एक्स को आदेश देकर पत्रकार के 1 जून से लेकर अब तक के तमाम डिजिटल फुटप्रिंट्स और डेटा मांग लिए, ताकि चंदा चोरी की रिपोर्टिंग करने वाले स्रोतों तक पहुंचा जा सके।

जांच के नाम पर निजता का हनन नहीं

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि 18 अगस्त के रोड रेज मामले की जांच और 1 जून से डिजिटल डेटा मांगने के आदेश का आपस में कोई तालमेल नहीं है।

पुलिस पत्रकार के डेटा की ताका-झांकी नहीं कर सकती

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस आईटी एक्ट को ढाल बनाकर किसी आरोपी या पत्रकार के पुराने डिजिटल डेटा की ताका-झांकी नहीं कर सकती। केवल किसी गंभीर और लंबी साजिश के मामलों में ही सीमित डेटा मांगा जा सकता है, न कि मौलिक अधिकार और व्यक्तिगत निजता को कुचलने के लिए।

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