मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद सियासी चर्चाएं तेज
भाजपा-सपा के बीच फिर आमने-सामने की राजनीति के संकेत
12 दिसंबर को रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन की तैयारी
CM Yogi Took A Dig: उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को प्रस्तावित अयोध्या दौरे से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ अखिलेश यादव रामलला के दरबार में मत्था टेकने और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के मंच से ऐसा संदेश दिया है, जिसे राजनीतिक गलियारों में अखिलेश के प्रस्तावित दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है।
दीपोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आने वालों को संतों से माफी मांगकर आना चाहिए। उन्होंने रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों से भी माफी मांगने की बात कही। मुख्यमंत्री के इस बयान को समाजवादी पार्टी और उसके पुराने राजनीतिक रुख पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, राम मंदिर का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भाजपा लगातार सपा पर राम मंदिर आंदोलन और रामभक्तों के प्रति उसके पुराने रुख को लेकर सवाल उठाती रही है। वहीं, अखिलेश यादव का प्रस्तावित अयोध्या दौरा इस राजनीतिक विमर्श को नया आयाम दे सकता है।
सियासी नजरिए से देखें तो अखिलेश का अयोध्या जाना महज धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं माना जा रहा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख की यह पहल भाजपा के उस राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश भी हो सकती है, जिसमें राम मंदिर और हिंदुत्व प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या अखिलेश का अयोध्या दौरा सपा की राजनीतिक रणनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत है या फिर यह आस्था के जरिए जनता के बीच नया संदेश देने की कोशिश है? फिलहाल इतना तय है कि 12 दिसंबर से पहले ही अयोध्या की सियासत गर्माने लगी है।