Agra Traders Protest: यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब शहर से निकलकर देहात और कस्बों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। 18 और 20 सितंबर को आगरा में हुए प्रदर्शनों के बाद आंदोलनकारियों ने मुड़ी चौराहा, एत्मादपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रदर्शन तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार यूजीसी को वापस नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।
हाल के प्रदर्शनों के दौरान स्थिति कई जगह तनावपूर्ण रही। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर ट्रैक्टर चढ़ाने के प्रयास के आरोप भी सामने आए। यमुना एक्सप्रेसवे पर भी प्रदर्शनकारियों ने करीब 30 मिनट तक यातायात प्रभावित किया।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और दिल्ली तक प्रदर्शन ले जाने के साथ ट्रेनों को रोकने की बात भी कही गई है।
इसी क्रम में मंगलवार को आगरा के राजपुर चुंगी और जंगजीत नगर क्षेत्र में व्यापारियों और सामान्य वर्ग के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर आंदोलन के समर्थन का दावा किया। व्यापार सभा से जुड़े गोविंद पाराशर ने कहा कि सामान्य वर्ग यह जानना चाहता है कि यूजीसी से जुड़े इस बदलाव की मांग आखिर किसने की थी। उनका सवाल था कि यदि एससी, एसटी और पिछड़े वर्ग के लोगों ने इसकी मांग नहीं की, तो सामान्य वर्ग पर इसे क्यों लागू किया गया।
गोविंद पाराशर ने केंद्र सरकार पर समाज को आपस में बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के लोगों ने भाजपा के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने सरकार बनाने में भूमिका निभाई है, वह अपने राजनीतिक निर्णय लेने की ताकत भी रखता है। पाराशर के मुताबिक, आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस की निगरानी सुबह करीब तीन बजे से ही शुरू हो गई थी, इसके बावजूद व्यापारियों ने स्वतः अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया।
उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यूजीसी रोलबैक की मांग केवल आगरा शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि देहात और कस्बों में भी इसका असर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार ने यदि मांगों पर विचार नहीं किया तो आंदोलन का अगला चरण और बड़ा हो सकता है।
राजनीतिक तौर पर भी आंदोलनकारियों के बयानों में सरकार के प्रति नाराजगी दिखाई दे रही है। गोविंद पाराशर ने कहा कि 2027 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्थन देने की बात अलग है, लेकिन उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन नहीं देने की चेतावनी दी। हालांकि, यह उनका राजनीतिक बयान है और इसका वास्तविक चुनावी असर भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रम और मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।
फिलहाल आगरा में यूजीसी रोलबैक आंदोलन का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। शहर, देहात और कस्बों में हो रहे प्रदर्शनों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती आंदोलन को नियंत्रित रखने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की भी है।