सत्याग्रह आंदोलन का ऐलान (सोर्स- फोटो नवभारत)
आगरा

आगरा में BJP के खिलाफ सवर्ण समाज का सत्याग्रह ऐलान, बोले- 1980 का दौर लौटाएंगे, दो सीटों तक पहुंचाएंगे

Savarna Samaj Satyagraha Agra: आगरा में सवर्ण समाज ने BJP के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन का ऐलान किया। वक्ताओं ने शिक्षा, रोजगार और अधिकारों को लेकर नाराजगी जताते हुए राजनीतिक ताकत दिखाने का संकल्प लिया।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Savarna Samaj Protest Against BJP: अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन ने जिस तरह तत्कालीन सत्ता की नींव हिला दी थी, अब उसी इतिहास की तर्ज पर आगरा में एक नए आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी है। यह दावा उन सवर्ण समाज के नेताओं और वक्ताओं का है, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। आगरा में सत्याग्रह शुरू करने वाले लोगों का कहना है कि दशकों तक भाजपा को अपना समर्थन और वोट देने वाला सवर्ण समाज अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है और आगामी समय में इसका राजनीतिक जवाब देने के लिए तैयार है।

सत्याग्रह आंदोलन की नींव रखने वाले पदाधिकारियों ने भाजपा के राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए कहा कि कभी दो सीटों से शुरुआत करने वाली भाजपा आज केंद्र की सत्ता तक पहुंची है। लेकिन अब सवर्ण समाज के पास भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का समय आ गया है। वक्ताओं ने यहां तक कहा कि जिस समाज ने वर्षों तक भाजपा का साथ दिया, वही समाज अब उसे उसकी राजनीतिक ताकत का अहसास कराएगा।

‘लाठियां खाईं, अब जवाब देने का समय’

सवर्ण समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि युवाओं के साथ शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भेदभाव हो रहा है। उनका दावा है कि कुछ वर्गों के युवाओं को सरकारी नौकरियों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के अवसर आसानी से मिल जाते हैं, जबकि सवर्ण समाज का युवा मामूली अंतर से निर्धारित मानक पूरा नहीं कर पाने पर अवसर से वंचित रह जाता है।

वक्ताओं ने केंद्र सरकार और पुलिस-प्रशासन पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर आगरा, जलेसर, कासगंज और एटा तक आंदोलनों के दौरान सवर्ण समाज के लोगों पर पुलिस की लाठियां बरसाई गईं।

‘युवाओं को गोली मार दें, फांसी दे दें...’

सत्याग्रह कार्यकारिणी के सदस्यों का आक्रोश इस कदर नजर आया कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान जलियांवाला बाग कांड और जनरल डायर का उदाहरण देते हुए बेहद तल्ख बयान दिए। उन्होंने कहा कि यदि अपने अधिकारों की आवाज उठाने की कीमत युवाओं को पुलिस की लाठियां, गोलियां या फांसी के रूप में चुकानी पड़े तो भी समाज पीछे नहीं हटेगा।

उन्होंने कहा कि अब लड़ाई किसी एक व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने युवाओं के भविष्य और अधिकारों को लेकर है। उनका कहना था कि यदि सवर्ण समाज अभी नहीं जागा तो आने वाले समय में उसके अधिकार और सीमित किए जा सकते हैं।

एकता के जरिए राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी

आंदोलन के ऐलान के बीच सवर्ण समाज ने एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि अब समाज को जातीय और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर अपने अधिकारों के लिए एक मंच पर आना होगा। वक्ताओं ने दावा किया कि आने वाला आंदोलन केवल आगरा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे व्यापक स्तर तक ले जाने की तैयारी है।

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