Kisan leader Shyam Singh Chahar Case: आगरा में किसान नेता श्याम सिंह चाहर को कथित तौर पर अपनी जांच रिपोर्ट में ‘पागल’, ‘मनोरोगी’ और ‘मानसिक रोगी’ बताने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से संज्ञान लिए जाने के बाद सहकारिता विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को पूरे प्रकरण की जांच कर निर्धारित अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
मामला सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक आदित्य कुमार की 3 जून 2026 की जांच रिपोर्ट से जुड़ा है। किसान नेता श्याम सिंह चाहर का आरोप है कि उन्होंने सहकारिता विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की थी। जांच के दौरान अधिकारी ने बिना किसी चिकित्सकीय प्रमाण या साक्ष्य के उन्हें ‘पागल’ और ‘मनोरोगी’ जैसी टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट में दर्ज कर दिया।
श्याम सिंह चाहर लंबे समय से किसानों और सहकारिता विभाग से जुड़े मुद्दों को प्रशासन तथा शासन के सामने उठाते रहे हैं। उनका दावा है कि सहकारिता विभाग में करीब 4.12 करोड़ रुपये की लागत से 21 गोदामों के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि भुगतान किए जाने के बावजूद कई गोदामों का निर्माण पूरा नहीं हुआ। मामला उठाए जाने के बाद कुछ स्थानों पर निर्माण शुरू हुआ, लेकिन करीब एक दर्जन गोदाम अब भी अधूरे बताए जा रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण को ‘नव भारत’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद किसान नेता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की। बताया गया है कि 20 जुलाई, 2026 के पत्र के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन मामले में अपेक्षित कार्रवाई न होने पर 11 अगस्त को मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ-साथ सहकारिता विभाग के उच्चाधिकारियों को दोबारा अवगत कराया गया।
इसके बाद सहकारिता आयुक्त योगेश कुमार के निर्देश पर बैंकिंग आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कराई।
समिति में संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता, अलीगढ़ मंडल को अध्यक्ष, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, अलीगढ़ को सदस्य तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, मथुरा को सदस्य बनाया गया है। समिति से करीब 15 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
मुख्यमंत्री स्तर से कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसान नेता को मानसिक रोगी बताने वाली टिप्पणी किस आधार पर की गई थी और क्या जांच रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करने के लिए आवश्यक प्रमाण मौजूद थे।
श्याम सिंह चाहर का कहना है कि वह भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
उनका आरोप है कि शिकायतों के कारण कई अधिकारी उनसे नाराज हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। अब अलीगढ़ मंडल के अधिकारी के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय कमेटी की जांच पर निगाहें टिकी हैं।
जांच रिपोर्ट से यह साफ होगा कि किसान नेता के खिलाफ की गई गंभीर टिप्पणियों का आधार क्या था और सहकारिता विभाग के अधिकारी की भूमिका पर आगे क्या कार्रवाई होती है।