आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन (सोर्स- फोटो नवभारत)
आगरा

15 अगस्त पर हाई अलर्ट के दावे, आगरा फोर्ट स्टेशन के रियलिटी चेक ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल

Agra News: 15अगस्त से पहले आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन के रियलिटी चेक में प्लेटफॉर्मों पर सुरक्षा कर्मियों की कम मौजूदगी सामने आई। हाई अलर्ट के दावों के बीच स्टेशन पर GRP और RPF की मौजूदगी बेहद कम नजर आई।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Agra Fort Railway Station: स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को लेकर देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। राजधानी नई दिल्ली से लेकर ताज नगरी आगरा तक संवेदनशील स्थानों पर चौकसी बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। रेलवे स्टेशनों पर RPF, GRP, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते को सक्रिय किया गया है।

आगरा मंडल में भी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा में किसी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यहां तक कि 15 अगस्त तक आगरा से आने-जाने वाले पार्सल पर भी रोक लगाए जाने की बात सामने आई है।

क्या है इस दावे की सच्चाई

आगरा मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त एस. रामकृष्ण के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रेलवे परिसरों के साथ ट्रेनों में भी निगरानी और चेकिंग की जा रही है।

लेकिन सवाल यह है कि हाई अलर्ट का यह दावा जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?

स्टेशन पर GRP और RPF की मौजूदगी बेहद कम

इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए "नवभारत" ने लगातार दूसरे दिन आगरा मंडल के रेलवे स्टेशनों का रियलिटी चेक किया। बुधवार रात करीब 8:30 बजे आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर पड़ताल के दौरान प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्कैनर के पास RPF के जवान दिखाई दिए, लेकिन स्टेशन के अन्य हिस्सों में GRP और RPF की मौजूदगी बेहद कम नजर आई।

अब गुरुवार को आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर किए गए रियलिटी चेक ने भी कई सवाल खड़े कर दिए।

प्लेटफॉर्मो पर केवल एक- दो सुरक्षा कर्मियों रहे तैनात

नवभारत की टीम शाम करीब 5:50 बजे आगरा फोर्ट स्टेशन पहुंची। स्टेशन में प्रवेश करते ही दाईं तरफ RPF का एक कर्मचारी निगरानी करता हुआ दिखाई दिया। लेकिन इसके बाद जैसे-जैसे टीम प्लेटफॉर्म नंबर एक, दो और तीन की तरफ आगे बढ़ी, वहां सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर चौंकाने वाली नजर आई।

प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की आवाजाही थी, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी नजर नहीं आई।

नवभारत की टीम ने स्टेशन पर मौजूद यात्रियों से भी बातचीत की। यात्रियों ने भी स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी न होने की बात कही। उनका कहना था कि जब 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट का दावा कर रही हैं, तो रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान पर हर प्रमुख हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए।

हाई अलर्ट… लेकिन जमीन पर कौन?

यहां सवाल सिर्फ सुरक्षा कर्मियों की संख्या का नहीं, बल्कि उस सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता का है जिसका दावा स्वतंत्रता दिवस से पहले किया जा रहा है।

अगर किसी स्टेशन पर अचानक कोई संदिग्ध वस्तु मिल जाए, कोई आपराधिक घटना हो जाए या यात्रियों के बीच किसी तरह की अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो जाए, तो तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए सुरक्षा बल कहां मौजूद होंगे?

और अगर कोई बड़ा हादसा हो गया तो जिम्मेदारी RPF की होगी, GRP की, रेलवे प्रशासन की या मंडल स्तर के अधिकारियों की?

आगरा फोर्ट और आगरा कैंट जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर लगातार किए गए रियलिटी चेक के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों और दावों में हाई अलर्ट है, या वास्तव में जमीन पर भी?

स्वतंत्रता दिवस में अब महज कुछ ही वक्त बचा है। ऐसे में रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ सुरक्षा का दावा करने की नहीं, बल्कि यात्रियों को यह भरोसा दिलाने की है कि स्टेशन के हर कोने में उनकी सुरक्षा के लिए कोई न कोई जिम्मेदार व्यवस्था मौजूद है।

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