प्रसव पीड़ित महिला (सोर्स- फोटो नवभारत)
आगरा

सड़क ऐसी कि एंबुलेंस ने भी खड़े किए हाथ, आगरा में प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को चारपाई पर उठाकर ले गए परिजन

Agra Ambulance Problem: मोहब्बत के शहर आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र में जलभराव और खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। प्रसव पीड़ित महिला को परिजन चारपाई पर आधा किमी तक लेकर गए।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Agra Fatehabad Waterlogging: मोहब्बत का शहर आगरा, ताजमहल का शहर, आगरा कालिंदी के किनारे बसा आगरा.स्मार्ट सिटी और मेट्रो शहर के तमगों के बीच इसी आगरा के देहात की तस्वीर विकास के दावों को आईना दिखा रही है। फतेहाबाद क्षेत्र में बदहाल रास्ते और जलभराव के चलते एक बार फिर इंसानियत और व्यवस्था दोनों को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है।

प्रसव पीड़ा से कराह रही एक महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए जब एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी तो परिजनों को मजबूरी में उसे चारपाई पर लिटाकर कंधों पर उठाना पड़ा। करीब आधा किलोमीटर तक परिजन पानी भरे और बेहद खराब रास्ते से चारपाई लेकर आगे बढ़ते रहे।

जलभराव- रास्ते की बदहाली के कारण गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस

बताया जा रहा है कि फतेहाबाद क्षेत्र की रहने वाली रीना को प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। परिजनों ने एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन जलभराव और रास्ते की बदहाली के चलते एंबुलेंस गांव तक पहुंचने में असमर्थता जताई गई। ऐसे में प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को चारपाई पर लिटाया गया और परिजन उसे कंधों पर उठाकर पानी से भरे रास्ते को पार कर मुख्य मार्ग तक लेकर पहुंचे। इसके बाद महिला को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जा सका।

प्रसव पीड़ित महिला

रीना की यह चौथी प्रसव पीड़ा थी। उसके पहले से तीन बेटियां हैं। ऐसे संवेदनशील समय में जब महिला को तत्काल चिकित्सकीय सहायता और सुरक्षित परिवहन की जरूरत थी, तब परिवार को चारपाई ही एंबुलेंस का विकल्प बनानी पड़ी।

इसके पहले भी शव को गांव तक पहुंचाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ा

सबसे गंभीर बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर जलभराव ने दूसरी बार व्यवस्था की पोल खोली है। इससे पहले 21 अगस्त को भी एक शव को गांव तक पहुंचाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ा था। यानी बारिश और जलभराव के बाद ग्रामीणों के लिए एंबुलेंस ही नहीं, शव वाहन तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी, प्रसव पीड़ा या किसी आपात स्थिति में गांव तक वाहन नहीं पहुंच पाता। ऐसे में चारपाई ही उनका सबसे बड़ा सहारा बन गई है। सवाल यह है कि जब रास्ते की हालत ऐसी है कि एंबुलेंस तक गांव में प्रवेश नहीं कर सकती, तो फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं के दावों का क्या मतलब रह जाता है?

जमीनी विकास के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है यह स्थिति

आगरा में स्मार्ट सिटी, मेट्रो और विकास की बड़ी-बड़ी योजनाओं के बीच देहात की यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। जिले में भाजपा के दो सांसद, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों की सड़कों और जलनिकासी की यह स्थिति जमीनी विकास के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है। प्रसव पीड़ित महिला का चारपाई पर पानी भरे रास्ते से गुजरना सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जहां सड़क और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी ग्रामीणों को समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

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