Monika Naz Khan SP Controversy Agra: विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी की आगरा महानगर इकाई में अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। एक टिप्पणी- "सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली" से शुरू हुआ विवाद आरोप-प्रत्यारोप, इस्तीफे और पुलिस कार्रवाई की बात तक पहुंच गया है।
पार्टी के दो महानगर उपाध्यक्षों ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की है। दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
विवाद की शुरुआत सपा की राष्ट्रीय सचिव मोनिका नाज खान को लेकर की गई एक कथित टिप्पणी से हुई। महानगर उपाध्यक्ष जमीलउद्दीन खान की ओर से की गई टिप्पणी के बाद मामला तूल पकड़ गया। मोनिका नाज खान ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्हें लेकर लगातार ऐसी बातें कही जा रही हैं, जिनसे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच रही है।
मोनिका नाज खान ने ‘नवभारत’ से विशेष बातचीत में इस पूरे विवाद के पीछे महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास की भूमिका होने का आरोप लगाया था। हालांकि शब्बीर अब्बास ने इन आरोपों से साफ इनकार किया और कहा कि उनका मोनिका नाज खान के साथ इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
मोनिका नाज खान का आरोप है कि महानगर उपाध्यक्ष नासिर खान और जमीलउद्दीन खान महानगर अध्यक्ष के इशारे पर उनके खिलाफ माहौल बनाने और महिला सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं। दूसरी ओर अब दोनों उपाध्यक्षों ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
गुरुवार को महानगर उपाध्यक्ष जमीलउद्दीन खान और नासिर खान ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। बातचीत के दौरान जमीलउद्दीन खान भावुक नजर आए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है और आरोप लगाया कि मोनिका नाज खान उनके खिलाफ किसी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकती हैं। उन्होंने मोनिका पर लोगों को कथित तौर पर फंसाने और गंभीर आरोप लगाकर उनसे पैसे वसूलने जैसे आरोप भी लगाए। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि सामने नहीं आई है।
जमीलउद्दीन खान ने कहा कि वह पूरे प्रकरण के कारण समाजवादी पार्टी की छवि खराब होते नहीं देख सकते। इसी वजह से उन्होंने महानगर उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
वहीं, दूसरे महानगर उपाध्यक्ष नासिर खान ने भी मोनिका नाज खान पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनके कारण पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है। नासिर खान ने भी अपने पद से त्यागपत्र देने की घोषणा की। नासिर खान ने कहा कि दोनों नेता अब लखनऊ जाकर पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और कार्रवाई नहीं की गई तो वे आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इस बयान के बाद विवाद की गंभीरता और बढ़ गई है।
पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि आगरा में सपा की महानगर इकाई के भीतर मतभेद अब बंद कमरे की चर्चा नहीं रह गए हैं। दोनों पक्ष सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। एक तरफ मोनिका नाज खान अपने सम्मान और उत्पीड़न का मुद्दा उठा रही हैं, तो दूसरी तरफ नासिर खान और जमीलउद्दीन खान उन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास पर भी सवाल उठाए गए हैं, जबकि वह अपनी भूमिका से इनकार कर चुके हैं।
विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जब सभी दल संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान के लिए तैयार करने में जुटे हैं, ऐसे समय में आगरा सपा का यह विवाद पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। चुनावी तैयारियों के बीच महानगर इकाई में दो खेमों के बीच खुला टकराव संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब निगाहें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व अखिलेश यादव पर हैं। देखना होगा कि नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाता है, आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और दोनों पक्षों के नेताओं के खिलाफ पार्टी स्तर पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल आगरा सपा में टिप्पणी से शुरू हुई रार अब इस्तीफे और गंभीर आरोपों तक पहुंच चुकी है। चुनावी रणभूमि तैयार होने से पहले संगठन के भीतर मचा यह घमासान पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक सवाल बन गया है।