एक्सपायरी दवा केस (सोर्स-फोटो नवभारत) 
आगरा

आगरा में निशुल्क कैंप के नाम पर बच्चों को बांट दी एक्सपायरी दवा; भड़के ग्रामीणों का भारी हंगामा, 2 हिरासत में

Expired Medicine Case: आगरा के शमशाबाद में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर के नाम पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों की सूझबूझ से टला हादसा।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Agra Police Investigation Expired Medicine Case: उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद में समाज सेवा के नाम पर मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ बड़ा खिलवाड़ किया गया। शमशाबाद थाना क्षेत्र के नगला बीच गांव में आयोजित एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में बच्चों को कथित तौर पर एक्सपायरी दवाएं बांट दी गईं। इस बात का पता चलते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया।

फाउंडेशन ने लगाया था बाल स्वास्थ्य शिविर

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को UNM फाउंडेशन की तरफ से नगला बीच गांव के एक प्राथमिक विद्यालय में निशुल्क बाल स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था। इस शिविर में एक महीने के नवजात से लेकर छह साल तक के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही थी। डॉक्टरों के पर्चे के आधार पर बच्चों को पेट के कीड़ों की दवा, टॉनिक, सिरप और दूसरी दवाइयां मुफ्त में बांटी जा रही थीं।

घर पहुंचते ही खुला दवाओं का काला सच

कैंप खत्म होने के बाद जब मासूम बच्चे दवाइयां लेकर अपने-अपने घर पहुंचे, तो कुछ जागरूक अभिभावकों ने दवाओं के डिब्बे और रैपर पर लिखी एक्सपायरी डेट को चेक किया। तारीख देखते ही उनके होश उड़ गए, क्योंकि ज्यादातर दवाओं की समय-सीमा काफी पहले ही खत्म हो चुकी थी। देखते ही देखते यह खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। गुस्से से लाल ग्रामीण भारी संख्या में स्कूल परिसर पहुंचे और डॉक्टरों व कर्मचारियों को घेरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीणों की मुस्तैदी से बची बच्चों की जान

गांव वालों का सीधा आरोप है कि बच्चों के स्वास्थ्य और जान के साथ इतनी गंभीर लापरवाही कैसे बरती जा सकती है? ग्रामीणों ने कहा कि यह तो गनीमत थी कि किसी बच्चे ने दवा निगली नहीं थी, वरना अगर ये दवाएं बच्चों को पिला दी जातीं और किसी के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? ग्रामीणों ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठाई है।

पुलिस ने दो को लिया हिरासत में

मामले की गंभीरता को देखते हुए शमशाबाद थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हंगामा शांत कराया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फाउंडेशन से जुड़े दो जिम्मेदार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया और थाने ले आई। इसके साथ ही पुलिस ने मामले की कानूनी जांच के लिए ड्रग विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग मामले में ढिलाई बरत रहा है, क्योंकि देर रात तक कोई भी विभागीय अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचा था।

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