Highlights:
डिप्टी एसएस और RPF से जुड़े मामले के बाद अब AOM की मौत की चर्चा में
परिजनों ने लगाया मानसिक उत्पीड़न का आरोप
एनसीआरएमयू ने DRM कार्यालय पर किया प्रदर्शन
Agra Railway Division News: उत्तर मध्य रेलवे का आगरा रेल मंडल बीते कुछ समय से लगातार चर्चाओं और सुर्खियों में बना हुआ है। हाल ही में डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (डिप्टी एसएस) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) से जुड़ा मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था। अब सहायक परिचालन प्रबंधक (AOM) अभिषेक कुमार कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक बार फिर आगरा रेल मंडल को सुर्खियों में ला दिया है। इस घटना ने न केवल रेलवे की कार्यप्रणाली बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही और कर्मचारियों की कार्यस्थितियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय की ओर से अब तक किसी आंतरिक जांच कमेटी का गठन नहीं किया गया है। हैरानी की बात यह है कि रेलवे प्रशासन की ओर से फिलहाल विभागीय स्तर पर जांच की कोई स्पष्ट पहल भी सामने नहीं आई है। जनसंपर्क अधिकारी संजय गौतम ने बातचीत में इसकी पुष्टि की कि इस मामले में अभी कोई जांच कमेटी गठित नहीं की गई है।
अभिषेक कुमार कुशवाहा की मौत के बाद उनकी पत्नी और अन्य परिजनों ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न और अत्यधिक कार्यभार देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि अधिकारी काम के दबाव में मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। ऐसे में यह मामला केवल एक कर्मचारी की मौत तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि रेलवे के आंतरिक कार्य वातावरण और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी खड़ी करता है।
सवाल यह है कि जब मृतक के परिजन विभागीय अधिकारियों पर ही आरोप लगा रहे हैं, तो क्या रेलवे प्रशासन को अपने स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं करानी चाहिए? आंतरिक जांच कमेटी गठित होने पर विभागीय कार्यप्रणाली, कार्यभार के वितरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल हो सकती है। लेकिन फिलहाल ऐसी किसी कमेटी के गठन की जानकारी सामने नहीं आई है।
नतीजतन, पूरे मामले की जांच का दायरा फिलहाल सिविल पुलिस की तफ्तीश तक सीमित दिखाई दे रहा है। ऐसे में रेलवे की आंतरिक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया कब और कैसे शुरू होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। यदि विभागीय स्तर पर जांच ही नहीं होगी तो कार्यदबाव और कथित मानसिक उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की पड़ताल कौन करेगा? क्या केवल पुलिस जांच से रेलवे की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल पाएंगे?
घटना के संबंध में उत्तर मध्य रेलवे के आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय गौतम ने बताया कि शाम छह बजे के बाद अभिषेक कुमार कुशवाहा से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इसके बाद रेल कर्मचारी उनके चैंबर में पहुंचे तो वह सोफे पर लेटे हुए मिले। तत्काल उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
जनसंपर्क अधिकारी ने यह भी कहा कि अभी उनके संज्ञान में यह नहीं आया है कि मृतक के परिजनों ने क्या आरोप लगाए हैं। हालांकि, परिजनों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न और अधिक काम लेने के आरोप लगाए जाने के सवाल पर रेलवे प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
अधिकारी की मौत के बाद रेल कर्मचारियों में भी भारी आक्रोश देखने को मिला। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन (एनसीआरएमयू) के कर्मचारियों ने मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। यूनियन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कर्मचारियों के साथ कथित उत्पीड़न की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की मांग उठाई।
जनसंपर्क अधिकारी संजय गौतम ने बताया कि एनसीआरएमयू के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और उनका ज्ञापन रेलवे प्रशासन ने प्राप्त कर लिया है।
मूल रूप से गाजीपुर निवासी अभिषेक कुमार कुशवाहा का करीब चार महीने पहले सहायक परिचालन प्रबंधक के पद पर प्रमोशन हुआ था। इससे पहले वह प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य रेलवे के सतर्कता विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। उनका परिवार आगरा में रेलवे क्वार्टर में रहता था।
आगरा रेल मंडल में हुई इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या रेलवे प्रशासन परिजनों के आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच कराएगा? क्या कर्मचारियों पर काम के दबाव और अधिकारियों के व्यवहार की समीक्षा होगी? क्या मंडल स्तर पर कोई स्वतंत्र जांच कमेटी गठित की जाएगी या फिर पूरा मामला पुलिस की जांच तक ही सीमित रहेगा?
फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से आंतरिक जांच कमेटी गठित नहीं की गई है। ऐसे में अभिषेक कुमार कुशवाहा की मौत के वास्तविक कारणों के साथ-साथ परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल होना बेहद जरूरी है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक अधिकारी की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की जवाबदेही का भी है, जहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होनी चाहिए।