Rajnath Singh Agra Visit: खटिक समाज की सामाजिक एकजुटता, राजनीतिक भागीदारी और अधिकारों को लेकर रविवार को आगरा में आयोजित मंडल स्तरीय ‘खटिक गर्जना सम्मेलन’ में समाज की आवाज बुलंद हुई। खंदारी स्थित राव कृष्णपाल सिंह सभागार में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समाज को एकजुट रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “टूटने से हम बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।”
अखिल भारतीय खटीक समाज (रजि.) की ओर से आयोजित सम्मेलन में राजनाथ सिंह के साथ संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया और सांसद डॉ.भोला सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम संत दुर्बलनाथ जी के 165वें अवतरण दिवस को समर्पित रहा।
राजनाथ सिंह ने संत दुर्बलनाथ जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह केवल खटिक समाज के संत नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन समाज के संत हैं। उनके विचार और संदेश आज भी समाज को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि खटिक समाज का इतिहास धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाला रहा है और इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
रक्षा मंत्री ने शिक्षा को समाज की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि विशेष रूप से महिलाओं और बेटियों को शिक्षित और सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता और न ही कोई व्यक्ति तुच्छ होता है। समाज तभी आगे बढ़ेगा, जब हर वर्ग और हर व्यक्ति को सम्मान तथा अवसर मिलेगा।
राजनाथ सिंह ने डॉ.भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज बाबा साहेब के सिद्धांतों पर चलने का समय है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के लिए संघर्ष संविधान के दायरे में रहकर होना चाहिए। समाज को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने खटिक समाज के इतिहास को नए सिरे से सामने लाने की आवश्यकता भी बताई। राजनाथ सिंह के मुताबिक समाज की पहचान वीरों के रूप में रही है। खटिक समाज के सैनिकों ने रणभूमि में साहस दिखाया और अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद संघर्ष जारी रखा। 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों द्वारा किए गए शोषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज ने कभी भय के सामने सिर नहीं झुकाया। राम मंदिर आंदोलन में भी समाज की भागीदारी रही।
सम्मेलन में खटिक समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम संयोजक एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमंत चलनीवाले और आयोजक संजीव चक ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य समाज को संगठनात्मक रूप से मजबूत करना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में सामूहिक रणनीति तैयार करना है। सम्मेलन में राजनीतिक दलों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया।
राष्ट्रीय महासचिव संतोष के. खटीक ने सम्मेलन की प्रमुख मांगों की जानकारी देते हुए कहा कि देशभर में खटिक समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। चक उपजाति को खटिक जाति में शामिल कर अनुसूचित जाति का दर्जा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा आगरा मंडल में समाज को संख्या बल के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने तथा योग्य और सक्षम लोगों को राजनीतिक, सामाजिक और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर उचित भागीदारी देने की मांग की गई।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि संत दुर्बलनाथ के आदर्शों और सिद्धांतों को संगठन के विधान में शामिल किया गया है। उन्होंने राजनाथ सिंह से देशभर में खटिक समाज की पहचान एक ही नाम से सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र सहित सरकारी दस्तावेजों में पहचान के रूप में ‘खटिक’ नाम दर्ज होना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से अपने नाम के साथ ‘खटिक’ लिखने की अपील की। साथ ही खटिक समाज के लिए अलग बटालियन गठित करने की मांग भी रखी।
सांसद डॉ.भोला सिंह ने कहा कि राजनाथ सिंह ने राजनीतिक स्तर पर समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पिछली बार छह सांसदों को एक साथ टिकट दिए जाने को समाज की राजनीतिक भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
सम्मेलन में राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया। हालांकि उन्होंने मुकुट को अपने पास रखने के बजाय इसे तुड़वाकर चांदी की पायल बनवाने और किसी जरूरतमंद गरीब कन्या के विवाह में भेंट करने की बात कही। उनके इस सुझाव ने कार्यक्रम में सामाजिक सरोकार और सेवा का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का संचालन संतोष चक ने किया। पूर्व विधायक शिवसिंह चक ने भी विचार रखे। सम्मेलन में राम तीरथ, गौरव चक, ब्रह्मचारी चक, गुड्डू मेनन, सुनील चक, पवन चक्रवाती, कुसुमलता वर्मा, लाखन सिंह चक, शिवकुमार सूर्यवंशी, पुष्पेंद्र खटिक, डॉ.विनोद धारिया, गौरव सेजवार, रवि मधुरिया सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।