Agra Government Job Scam: "देश के तमाम युवा आईएएस और पीसीएस बनने का ख्वाब पलते हैं, इसके लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ता है कड़ी मेहनत करनी पड़ती है तब जाकर वह यूपीएससी क्रैक कर पाते हैं और एसडीएम या आईएएस बनते हैं। लेकिन आगरा में आप मात्र 90 लाख रुपये देकर एसडीएम बन सकते हैं"... देखिए विशेष रिपोर्ट...
भारत में करोड़ों की जनसंख्या है और इन्हीं करोड़ों लोगों के बीच में ऐसे तमाम युवा हैं जो सरकारी नौकरी का ख्वाब पालते हैं, युवा सरकारी नौकरी की चाहत में कड़ी मेहनत करते हुए भी दिखाई देते हैं। कई बार जिंदगी कड़ी परीक्षा लेती है और उनका जीवन भी.. लेकिन जो लोग हार जाते हैं वह वहीं ठहर जाते हैं और जो भरोसा रखते हैं कि उन्हें निश्चित तौर पर सरकारी नौकरी मिलेगी वह आगे बढ़ते हुए कड़ा परिश्रम करते हैं और उन्हें सरकारी नौकरी भी प्राप्त होती है लेकिन उसके पीछे लंबा संघर्ष छुपा होता है।
क्या आपको पता है आगरा में एक ऐसा व्यक्ति है जो चंद रुपये में आपको नौकरी दिला सकता है, जी हां हम बिल्कुल सही कह रहे हैं। लेकिन जरा आप ठहरहिए.! जो मोटी रकम लेकर सरकारी नौकरी का भरोसा दिला रहा है वह आगरा की खेरागढ़ तहसील का एक बड़ा ठग है। उसने खेरागढ़ विधानसभा के विधायक भगवान सिंह कुशवाहा के छोटे भाई विजय पाल बघेल को भी नहीं छोड़ा, राजेश बघेल ने भगवान सिंह कुशवाहा के भाई के बेटे की सरकारी नौकरी का वादा कर दिया और इसकी एवज में मोटी क़ीमत भी चुकायी। यही नहीं विधायक के भतीजे को बकायदा जनपद हाथरस के एक सरकारी विभाग में ट्रेनिंग भी दिलायी गई।
सरकारी नौकरी पाने का सपना दिखाकर लाखों रुपये की कथित वसूली, फर्जी नियुक्ति पत्र और यहां तक कि सरकारी विभागों के मुख्यालय तक ले जाकर विश्वास कायम करने के आरोपों ने आगरा में सनसनी मचा दी है। नटवर लाल राजेश बघेल का नाम सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर अलग-अलग लोगों से बड़ी रकम ली गई। अब एक-एक कर कई पीड़ित सामने आ रहे हैं। इन पीड़ितों को विश्वास और भरोसा दिलाने का काम किया है विधायक भगवान सिंह कुशवाहा के भाई विजय पाल ने, विजय पाल ने जैसे ही थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गई उसके बाद धीरे धीरे राजेश बघेल के द्वारा ठगे गए अन्य पीड़ित भी सामने आ गए।
मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि खेरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से जुड़े भाजपा विधायक के भाई के साथ भी कथित तौर पर नौकरी के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ितों का दावा है कि इस कथित नेटवर्क का दायरा जिला पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हाईकोर्ट सहित विभिन्न सरकारी पदों तक बताया जाता था।
पीड़ित प्रबल प्रताप का आरोप है कि उन्होंने अपने भाई को हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने के लिए करीब 12 लाख रुपये दिए थे। आरोप है कि रकम लेने के बाद नौकरी का भरोसा दिलाया गया, लेकिन नियुक्ति नहीं हुई। इसके बाद उन्हें कथित ठगी का एहसास हुआ।
मामले में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। एक पीड़ित के अनुसार, कथित तौर पर 90 लाख रुपये में SDM पद पर नौकरी लगवाने की बात कही गई थी। ह सामने आ रहे इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पीड़ित योगेंद्र का आरोप है कि वह अपने बेटे की नौकरी के लिए राजेश बघेल के संपर्क में आए थे। कथित तौर पर 12 लाख रुपये में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। योगेंद्र का दावा है कि उनके बेटे को नियुक्ति पत्र भी दिया गया और कुछ समय तक ट्रेनिंग कराई गई। करीब तीन महीने बाद जब नौकरी नहीं मिली तो बेटा वापस घर लौट आया।
पीड़ितों का कहना है कि राजेश बघेल एक निजी डिग्री कॉलेज में प्राचार्य के पद पर भी कार्यरत रहा है। शिक्षा क्षेत्र से लंबे समय तक जुड़े होने के कारण स्थानीय लोगों में उसकी पहचान और भरोसा बना हुआ था। आरोप है कि इसी सामाजिक विश्वास का इस्तेमाल सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए किया गया।
डिग्री कॉलेज के प्रबंधन से जुड़े एक परिवार के सदस्य के भी कथित तौर पर ठगी का शिकार होने का दावा किया गया है। इसी परिवार की ओर से अब पूरे मामले को सामने लाने की बात कही जा रही है।
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब भाजपा विधायक के भाई से जुड़ा विवाद सामने आया। पीड़ितों का आरोप है कि नौकरी के लिए राजेश बघेल का मोबाइल नंबर विधायक की पत्नी तक पहुंचाया गया था, ताकि उनके बेटे की नौकरी के संबंध में बातचीत हो सके।
आरोपों के मुताबिक, विधायक के भतीजे की नौकरी के लिए भी रकम दी गई और उन्हें कथित तौर पर ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति भी राजेश बघेल के संपर्क में आया। बताया जा रहा है कि विधायक के भाई ने भी उसे वही मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया, जिसके जरिए वह राजेश बघेल के संपर्क में आया था।
पीड़ितों का आरोप है कि नौकरी के नाम पर कथित ठगी का शिकार होने के बावजूद उक्त व्यक्ति ने राजेश बघेल के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय विधायक के भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। पीड़ित पक्ष इसे गलत और साजिश का हिस्सा बता रहा है। हालांकि इस पूरे आरोप की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पीड़ितों का दावा है कि उनकी जानकारी में अब तक करीब दो करोड़ रुपये या उससे अधिक की रकम नौकरी दिलाने के नाम पर लिए जाने के आरोप हैं। कुछ पीड़ितों का यह भी दावा है कि अलग-अलग थानों में संबंधित आरोपी के खिलाफ पहले से मुकदमे दर्ज हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि अगर आरोप इतने गंभीर हैं तो क्या इस कथित नेटवर्क की जांच व्यापक स्तर पर हुई है? क्या वास्तव में फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए गए? सरकारी विभागों के नाम का इस्तेमाल कैसे हुआ? रकम किन लोगों तक पहुंची और इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति या प्रभावशाली व्यक्ति शामिल है या नहीं?
पीड़ितों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय, फर्जी नियुक्ति पत्रों की जांच तथा दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।