Gyanesh Kumar Residence Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक निवास के बाहर प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार किए गए छह कांग्रेस नेताओं को मंगलवार को पुलिस ने सीजेएम राशिद अली की अदालत में पेश किया। मामले में पुलिस की ओर से लगाई गई संगीन धाराओं को लेकर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में जोरदार बहस की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए। बचाव पक्ष ने बताया कि बुधवार, 30 सितंबर को सभी नेताओं की ओर से जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाएगा।
गिरफ्तार नेताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा, रामदत्त दिवाकर, संतोष दीक्षित, आईडी श्रीवास्तव, नरेंद्र सोनी और अवधेश सोलंकी समेत एक दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं ने पैरवी की। अधिवक्ताओं ने पुलिस द्वारा लगाई गई घर में घुसकर मारपीट, जानलेवा हमले और 7 सीएल एक्ट समेत अन्य धाराओं पर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि कांग्रेस नेता आगरा में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आए थे और इसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास को देखने के लिए वहां तक पहुंचे थे। अधिवक्ताओं का कहना था कि नेताओं के हाथ में न कोई हथियार था और न ही लाठी-डंडे। उनका आरोप था कि कांग्रेस नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास में दाखिल भी नहीं हुए।
बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई और साक्ष्यों को लेकर भी सवाल खड़े किए। अधिवक्ताओं के मुताबिक, घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पुलिस ने कोर्ट के समक्ष पेश नहीं की। उनका तर्क था कि यदि आरोप गंभीर हैं तो घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बड़ी चौकी प्रभारी और रिंग रोड पुलिस से भी मामले को लेकर कई सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि घटना के मामले में पुलिस वादी क्यों बनी, जबकि जिस स्थान पर घटना होने की बात कही जा रही है, वहां के किसी व्यक्ति को वादी क्यों नहीं बनाया गया।
एफआईआर में उपद्रव के बाद लोगों के भागने का उल्लेख किए जाने पर भी अदालत ने सवाल किया कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बनी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि मौके से भागने वाले लोग कौन थे और उनके नाम गवाहों में क्यों शामिल नहीं किए गए।
अदालत की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि आरोपियों के हाथ में कौन से हथियार थे, जिसके आधार पर जानलेवा हमले जैसी गंभीर धारा लगाई गई। सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किए जाने को लेकर भी पुलिस से सवाल किए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, इन सवालों पर पुलिस की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका।
हालांकि, तमाम दलीलों और पुलिस की कार्रवाई पर उठाए गए सवालों के बाद कोर्ट ने गिरफ्तार छह कांग्रेस नेताओं को जेल भेजने के आदेश दिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा, संतोष दीक्षित और रामदत्त दिवाकर ने बताया कि सभी कांग्रेस नेताओं की ओर से 30 सितंबर को सीजेएम कोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। इस पर अदालत में सुनवाई होगी।
सुनवाई के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामनाथ सिकरवार, शहर अध्यक्ष अमित सिंह, प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष शिव पांडे, शहर प्रवक्ता याकूब शेख, अपूर्व शर्मा, मनोज बोहरा, सेवादल अध्यक्ष सचिन चौधरी, अनुज शिवहरे, सत्येंद्र कैम और अजहर वारसी समेत आगरा और मथुरा जनपद के कई कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।