Car Challan Music Traffic Rules: कार में सफर के दौरान तेज आवाज में गाना सुनना कई लोगों की पसंदीदा आदत होती है। हालांकि म्यूजिक की आवाज इतनी तेज हो कि बाहर तक पहुंचे, तो यह कानूनी मुसीबत बन सकती है।
तेज आवाज से चालक का ध्यान भटकता है और एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का सायरन नहीं सुनाई देता। इसी वजह से ट्रैफिक पुलिस मोटर वाहन कानून और शोर मानकों के तहत चालान काट सकती है।
कार में तेज म्यूजिक बजाने और शोर से जुड़े उल्लंघन पर ट्रैफिक पुलिस कड़े नियम लागू करती है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत शोर प्रदूषण फैलाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
पहली बार यह नियम तोड़ने और पकड़े जाने पर 1000 रुपये से 10000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है। हालांकि जुर्माने की यह सटीक राशि अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भिन्न हो सकती है। सिर्फ शोर प्रदूषण ही नहीं, बल्कि कार में बेहद तेज गाना बजाना खतरनाक ड्राइविंग भी माना जा सकता है।
अगर पुलिस को लगता है कि तेज म्यूजिक के कारण आपका ध्यान भटक रहा है तो धारा 184 लगेगी। धारा 184 के तहत खतरनाक ड्राइविंग की श्रेणी में लाकर वाहन चालक पर कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए यह सोचना बिल्कुल गलत है कि कार के अंदर गाना बजाने पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकती।
अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अदालत जैसे महत्वपूर्ण परिसरों के आसपास का इलाका साइलेंस जोन होता है। इन संवेदनशीलता वाले स्थानों के पास शोर से संबंधित नियम अत्यधिक सख्त और कठोर लागू होते हैं।
साइलेंस जोन में दिन के समय 50 डेसिबल और रात के समय 40 डेसिबल से अधिक शोर की अनुमति नहीं है। यदि आपकी कार का म्यूजिक बाहर सड़क तक जोर से सुनाई देता है तो पुलिस तुरंत चालान काट सकती है। इतना ही नहीं, कार में आफ्टरमार्केट एम्पलीफायर, सबवूफर और बड़े स्पीकर लगवाना भारी पड़ सकता है।
कार कंपनियां तय मानकों के अनुसार ही म्यूजिक सिस्टम लगाती हैं ताकि नियमों का पालन हो सके। गाड़ी में किसी भी प्रकार का अवैध मॉडिफिकेशन करवाने पर पुलिस अलग से चालान कर सकती है। इसके अलावा कार की खिड़कियां खोलकर तेज म्यूजिक बजाने से बाहर के लोगों को परेशानी होती है।
सफर के दौरान कार के म्यूजिक सिस्टम की आवाज हमेशा नियंत्रित और सीमित रखनी चाहिए। म्यूजिक इतना ही तेज होना चाहिए जिससे सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
साइलेंस जोन या अस्पताल के पास से गुजरते समय गाने पूरी तरह बंद कर देना सबसे सुरक्षित उपाय है। गाड़ी चलाते समय अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे पहला और जरूरी कर्तव्य है। ड्राइविंग के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि पीछे से आ रहे वाहनों का हॉर्न साफ सुनाई दे।
इमरजेंसी वाहनों जैसे एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड के सायरन की आवाज सुनना सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। तेज म्यूजिक के कारण एम्बुलेंस को रास्ता देने में देरी हादसों का बड़ा कारण बन सकती है। इसलिए चालान से बचने और सुरक्षित सफर के लिए आवाज धीमी रखें और सड़क पर पूरा ध्यान दें।