AI Layoffs: एक समय था जब Mark Zuckerberg ने अपनी कंपनी Meta को AI के दम पर पूरी तरह बदलने का बड़ा सपना देखा था। लेकिन प्लान इतना बड़ा था कि हजारों कर्मचारियों की जगह AI एजेंट्स को काम सौंपने की तैयारी भी की गई थी। पर कुछ ही महीनों में यह महत्वाकांक्षी योजना मुश्किलों में घिर गई। क्योंकि कर्मचारियों के विरोध, निगरानी को लेकर नाराजगी और AI सिस्टम की बढ़ती गलतियों ने कंपनी को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया है।
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी में जुकरबर्ग ने हवाई स्थित अपने घर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक गुप्त बैठक की थी। इसी दौरान प्रोजेक्ट ऑर्गनाइजेशन ट्रांसफॉर्मेशन की योजना तैयार हुई थी। जिसका लक्ष्य Meta को एक ऐसी कंपनी बनाना था जहां AI रोजमर्रा के काम का बड़ा हिस्सा संभाले सकें।
वहीं आंतरिक दस्तावेजों की जानकारी के अनुसार कुछ टीमों में 60 फीसदी तक कर्मचारियों की कटौती की तैयारी थी। वहीं बचे हुए कर्मचारियों में से चुनिंदा टैलेंट AI एजेंट्स की निगरानी करतें। वहीं पुराने मैनेजर पदों की जगह टेक पॉड्स बनाए जा रहे थे और छंटनी को मई से नवंबर के बीच दो चरणों में लागू करने की योजना थी।
देखा जा रहा था कि जब मार्च में संभावित छंटनी की जानकारी सामने आई तो कंपनी के भीतर असंतोष बढ़ गया था। वहीं स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी कर्मचारियों के कंप्यूटरों पर ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर लगाए जाने की बात सामने आने लगी। इसका उद्देश्य कीबोर्ड और माउस गतिविधियों का डेटा लेकर AI को इंसानी काम करने के तरीके सिखाना था। जिसको देखते हुए कर्मचारियों को लगा कि वे उसी AI को प्रशिक्षित कर रहे हैं जो भविष्य में उनकी नौकरियां खत्म कर सकता है। इसके बाद आंतरिक माहौल बिगड़ गया और कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दिया।
वहीं इस मामले में सबसे बड़ा झटका तकनीकी मोर्चे पर लगा। जिसकी रिपोर्ट बताती है कि AI के इस्तेमाल से कोडिंग की रफ्तार 220 फीसदी बढ़ी लेकिन यूजर्स तक पहुंचने वाले नए फीचर्स में बढ़ोतरी सिर्फ 36 फीसदी तक देखी गई थी। इस दौरान तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं में भी पिछले साल की तुलना में 40 फीसदी उछाल बताया गया। जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि AI से काम तेज होने के बावजूद क्या उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा को उसी गति से संभाला जा रहा है?
ऐसे में बढ़ते दबाव के बीच 19 मई की रात जुकरबर्ग ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। इसके बाद नवंबर में प्रस्तावित दूसरी बड़ी छंटनी को रद्द कर दिया गया। जिसके बाद 20 मई को केवल 10 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की गई और कंपनी ने संकेत दिया कि इस साल अब कोई बड़ी कटौती नहीं होगी।
वहीं अब माउस ट्रैकिंग को भी रोक दिया गया है। हालांकि Meta का AI पर दांव अभी खत्म नहीं हुआ है। जिसमें करीब 130 अरब डॉलर के AI निवेश के बीच कंपनी पर निवेशकों की उम्मीदों का दबाव बना हुआ है। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि AI अपनाना सिर्फ तकनीक खरीदने का मामला नहीं बल्कि कर्मचारियों, सुरक्षा और बिजनेस रणनीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी है।