Turkey Social Media Ban की क्या है वजह। (सौ. Freepik) 
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नेपाल के बाद अब इस देश ने भी किया सोशल मीडिया को बैन, जानें क्या है वजह

CHP Protests: तुर्किए सरकार ने कई लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया। YouTube, X, Instagram और WhatsApp पर पाबंदी हो गया है।

सिमरन सिंह

Turkey Social Media Ban: तुर्किए सरकार ने सोमवार को अचानक बड़ा कदम उठाते हुए कई लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया। YouTube, X (पहले ट्विटर), Instagram और WhatsApp पर पाबंदी तब लागू हुई जब इस्तांबुल में पुलिस और विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (CHP) के समर्थकों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस दौरान देशभर में इंटरनेट की स्पीड लगभग 12 घंटे तक प्रभावित रही।

झड़प के बाद लगा बैन

जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया, जिसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इसी बीच सरकार ने सोशल मीडिया पर रोक लगाने का फैसला लिया। हालांकि कई यूजर्स ने VPN का सहारा लेकर इस पाबंदी को दरकिनार करने की कोशिश की। यह घटनाक्रम हाल ही में नेपाल में लगे सोशल मीडिया बैन से मिलता-जुलता है, जहां हालात बेकाबू होने पर कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था।

CHP मुख्यालय पर विवाद

Euronews की रिपोर्ट के मुताबिक, CHP समर्थक कई दिनों से इस्तांबुल मुख्यालय के बाहर डटे हुए थे। उनका विरोध सरकार द्वारा नियुक्त गुरसेल टेकिन को पार्टी दफ्तर का नियंत्रण सौंपने के खिलाफ था। टेकिन को सितंबर 2023 में चुने गए ओज़गुर सेलिक की जगह नियुक्त किया गया। इस कदम को लेकर माहौल और गरमा गया।

दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर तुर्किए की सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्राधिकरण (BTK) वेबसाइट या ऐप ब्लॉक होने पर आधिकारिक बयान जारी करती है, लेकिन इस बार कोई घोषणा नहीं हुई। बावजूद इसके, सोमवार शाम 5 बजे तक इस्तांबुल में प्रमुख प्लेटफॉर्म्स काम करना बंद कर चुके थे। कुछ प्रांतों में हालांकि सेवाएं आंशिक रूप से चालू रहीं।

विपक्ष पर बढ़ता दबाव

मार्च से ही सरकार और विपक्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस्तांबुल के मेयर और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार एकरेम इमामोग्लू की गिरफ्तारी के बाद कई अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। आलोचकों का आरोप है कि सरकार फिर से पूर्व अध्यक्ष केमल किलिचदारोग्लू को पार्टी की कमान सौंपना चाहती है, जबकि मौजूदा प्रमुख ओज़गुर ओज़ल को 2023 के अंत में चुना गया था।

सितंबर में होने वाली सुनवाई इस बात को तय करेगी कि किलिचदारोग्लू की वापसी होगी या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने पर पार्टी में और गहरी फूट पड़ सकती है। हालांकि 21 सितंबर को होने वाली असाधारण कांग्रेस में ओज़ल अब भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

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