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स्मार्टफोन के लगातार इस्तेमाल से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
2018 के अमेरिका में हुए अध्ययन में 14 से 17 साल के किशोरों में डिप्रेशन देखा गया।
इन तरीकों से आप भी अपना स्क्रीन टाइम कम कर सकते है।
Smartphone Addiction: आज के दौर में स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। जिसमें पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम और दोस्तों से बातचीत तक कई गतिविधियां स्क्रीन के जरिए होती हैं। वहीं अब तकनीक ने जिंदगी को और भी आसान बना दिया लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर डाल सकता है। जिसको देखते हुए सवाल यह है कि क्या हम तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं या धीरे-धीरे उसी पर निर्भर होते जा रहे हैं?
देखा जा रहा है कि खाना खाते समय फोन देखना, दोस्तों के साथ बैठकर सोशल मीडिया स्क्रॉल करना या सड़क पार करते समय मोबाइल में व्यस्त रहना अब आम दृश्य बन गए हैं। वर्चुअल रियलिटी और ऑनलाइन मनोरंजन हमें डिजिटल दुनिया में डूबने का मौका देते हैं लेकिन लगातार ऐसा करने से आसपास की वास्तविक गतिविधियों पर ध्यान कम भी होता जा रहा है।
वैसे तो तकनीक अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल कितनी देर और किस उद्देश्य से करते हैं। जिसमें जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम आमने-सामने बातचीत, शौक और दूसरी जरूरी गतिविधियों के लिए उपलब्ध समय को कम कर सकता है।
2018 में Preventive Medicine Reports में प्रकाशित एक अध्ययन में अमेरिका के 40,337 बच्चों और किशोरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें पाया गया कि 14 से 17 साल के जिन किशोरों ने रोजाना सात घंटे या उससे अधिक स्क्रीन का इस्तेमाल किया उनमें एक घंटे तक स्क्रीन इस्तेमाल करने वालों की तुलना में डिप्रेशन या एंग्जायटी में होने की संभावना दोगुने से ज्यादा थी।
लेकिन यह अध्ययन दोनों के बीच संबंध दिखाता है इसमें यह साबित नहीं होता है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का एकमात्र कारण है। फिर भी इस आकड़े के नतीजे से डिजिटल आदतों पर ध्यान देने की जरूरत बढ़ जाती है।
अगर आप अपना स्क्रीन टाइम कम करना चाहते है तो इसकी शुरुआत छोटे बदलावों से की जा सकती है। जिसमें खाना खाते समय फोन दूर रखें, दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत के दौरान नोटिफिकेशन बंद करें और दिन में कुछ समय टहलने, व्यायाम करने या कोई नया शौक सीखने के लिए निकालना शुरू कर दें।
वहीं सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करना और बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखना भी उपयोगी हो सकता है। इसमें ध्यान रखें कि काम, पढ़ाई और मनोरंजन के लिए स्क्रीन की जरूरत अलग-अलग होती है इसलिए सभी के लिए एक ही समय-सीमा सही नहीं मानी जाएगी।
आखिर में तकनीक को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं बल्कि उसका समझदारी से इस्तेमाल करना जरूरी है। देखा जाता है कि डिजिटल दुनिया से जुड़े रहने के साथ वास्तविक रिश्तों, शारीरिक गतिविधियों और खुद के लिए समय निकालना मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बेहतर संतुलन बनाने में मदद कर सकता है।