'स्टारशिप' की 14वीं उड़ान सोर्स- (@SpaceX)
टेक्नॉलजी

SpaceX की बड़ी उपलब्धि! पहली ही कोशिश में हासिल किया ऑर्बिट, दुनिया भर में कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती

SpaceX Mission: स्टारशिप की 14वीं उड़ान सोमवार को सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के बाद पहले ही प्रयास में ऑर्बिट में पहुंच गया है। स्पेस की दुनिया में एलन मस्क की कंपनी के लिए यह बड़ी उपलब्धि है।

नितिन कुमार राय

Starship’s 14th Flight Achieved Orbit: एलन मस्क की कंपनी SpaceX के सुपर हैवी रॉकेट 'स्टारशिप' ने अपनी 14वीं उड़ान में बड़ी कामयाबी हासिल की है। सोमवार को स्टारशिप ने अपनी पहली ही कोशिश में ऑर्बिट हासिल कर लिया और पहली बार सफलतापूर्वक स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाया है। कंपनी का कहना है कि ये सैटेलाइट्स ऐसा पेलोड ले गया है जो दुनिया भर में कनेक्टिविटी की स्पीड और भरोसे को काफी बढ़ा देगा।

V3 अगली पीढ़ी के लिए डिजाइन

स्टारलिंक V3 अगली पीढ़ी का सैटेलाइट डिजाइन है, जिसमें क्षमता, डेटा डेंसिटी और बिजली बनाने की क्षमता में काफी बढ़ोतरी की गई है। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट को 1 Tbps की डाउनलिंक और 160 Gbps की अपलिंक क्षमता को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। स्टारलिंक के अनुसार, यह स्टारलिंक V2 सैटेलाइट की तुलना में डाउनलिंक क्षमता में 10 गुना और अपलिंक क्षमता में 22 गुना सुधार है।

स्टारशिप से अलग होने के बाद, स्टारलिंक V3 सैटेलाइट अपने एंटीना खोलेंगे, सोलर ऐरे तैनात करेंगे और रेडियो फ़्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए जमीन और बाकी स्टारलिंक कॉन्स्टेलेशन से शुरुआती संपर्क बनाएंगे।

पानी में उतरने का लक्ष्य रखा गया

सैटेलाइट अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स की मदद से अपनी ऑर्बिट(कक्षा) को ऊपर उठाना शुरू करेंगे। जानकारी के अनुसार, ऑर्बिट में जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद, लॉन्च के कुछ हफ्तों के भीतर ही ये सैटेलाइट ग्राहकों को सेवा देना शुरू कर देंगे। स्टारशिप के शुरुआती ऑर्बिटल मिशन के पृथ्वी से लगभग 275 किमी की ऊंचाई पर उड़ान भरने और लगभग 10 घंटे की उड़ान के दौरान ग्रह के चारों ओर लगभग छह चक्कर लगाने की उम्मीद है। इसके साथ ही, चिली के पश्चिम में प्रशांत महासागर में इसके 'स्प्लैशडाउन' (पानी में उतरने) का लक्ष्य रखा गया है।

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कई बदलाव

फ्लाइट 14 पर बूस्टर का मुख्य परीक्षण उद्देश्य सफल लॉन्च, ऊपर की ओर उड़ान (एसेंट), स्टेज अलग होने की प्रक्रिया, बूस्टबैक बर्न और गल्फ ऑफ अमेरिका में समुद्र में बने लैंडिंग पॉइंट पर लैंडिंग बर्न को सफलतापूर्वक पूरा करना होगा। पिछली उड़ान में देखी गई समस्याओं को दूर करने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कई बदलाव किए गए हैं।  स्टारशिप के ऊपरी हिस्से के मुख्य लक्ष्यों में शामिल हैं:

  • पहली बार ऑर्बिटल इंसर्शन (कक्षा में प्रवेश) का काम

  • 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को तैनात करना

  • अंतरिक्ष में एक रैप्टर इंजन का इस्तेमाल करके डी-ऑर्बिट बर्न करना

  • प्रशांत महासागर में नियंत्रित तरीके से दोबारा प्रवेश (री-एंट्री), नीचे उतरना (डिसेंट) और पानी में उतरना (स्प्लैशडाउन)

तस्वीर खींचने के लिए कैमरा लगा

तीन सैटेलाइट्स में कैमरे लगाए गए हैं ताकि वे स्टारशिप की हीटशील्ड को स्कैन कर सकें और उसकी तस्वीरें ऑपरेटरों को भेज सकें। इससे भविष्य के मिशनों में लॉन्च साइट पर लौटने के लिए स्टारशिप की हीटशील्ड की तैयारी का विश्लेषण करने के तरीकों का परीक्षण जारी रखा जा सकेगा। SpaceX के अनुसार, स्टारशिप अब तक का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, जिसकी ऊंचाई 407 फीट है। इसके दोनों हिस्सों- सुपर हैवी बूस्टर और शिप अपर-स्टेज स्पेसक्राफ्ट को पूरी तरह और तेजी से दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाया गया है। SpaceX ने इसे 'रॉकेट्री का होली ग्रेल' यानी सबसे बड़ी कामयाबी कहा है।

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