National Critical Mineral Mission: भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन 'Pax Silica' में शामिल होने की घोषणा पर हस्ताक्षर कर दिए। यह समझौता नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान हुआ। इस कदम को भारत के लिए तकनीक, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
Pax Silica एक वैश्विक रणनीतिक गठबंधन है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर से जुड़ी सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाना है। 20वीं सदी में जहां दुनिया तेल और स्टील पर निर्भर थी, वहीं अब अर्थव्यवस्था सिलिकॉन और दुर्लभ खनिजों पर आधारित होती जा रही है। 'Pax' लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है शांति, जबकि 'Silica' उस खनिज को दर्शाता है जो कंप्यूटर चिप्स और AI सिस्टम की बुनियाद है। इस पहल का मकसद चीन के वर्चस्व को संतुलित करते हुए एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार करना है।
समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "India has become a part of the Pax Silica. This will greatly benefit India's electronics and semiconductor industry. Ten plants are already established in India and are in the process of being established, and very soon, the first semiconductor plant will begin commercial production. A complete ecosystem is emerging in India. Pax Silica will be crucial for this, and the youth of India will benefit from it," यह पहल भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूती देगी। देश में पहले ही 10 प्लांट स्थापित हो चुके हैं और जल्द ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
फिलहाल भारत अपने 93% रेयर अर्थ आयात के लिए चीन पर निर्भर है। Pax Silica के जरिए भारत इस निर्भरता को कम कर सकेगा और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से भी बचाव होगा। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में भू-राजनीतिक संकट के दौरान जो सप्लाई बाधाएं देखी गई थीं, उन्हें रोकना भी इस गठबंधन का लक्ष्य है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत की भागीदारी को "strategic and essential" बताया और कहा कि यह 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा। यह साझेदारी जापान, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ तकनीकी सहयोग को भी बढ़ाएगी।
भारत का यह कदम National Critical Mineral Mission और India Semiconductor Mission के अनुरूप है, जिससे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है।