Airtel VIP Internet (Source. Airtel) 
टेक्नॉलजी

Airtel के नए VIP इंटरनेट प्लान पर मचा बवाल, क्या टूट रहा है नेट न्यूट्रैलिटी का नियम

Airtel VIP Internet: Airtel ने कुछ पोस्टपेड ग्राहकों के लिए प्लान पेश किया है जिसमें उन्हें बाकी यूज़र्स की तुलना में बेहतर और तेज़ नेटवर्क एक्सेस दिया जा रहा है। लेकिन इसको लेकर चर्चा शुरु हो गई है।

सिमरन सिंह

Airtel Priority Plan: भारत में इंटरनेट की दुनिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बता दें कि Airtel ने अपने कुछ पोस्टपेड ग्राहकों के लिए ऐसा प्लान पेश किया है जिसमें उन्हें बाकी यूज़र्स की तुलना में बेहतर और तेज़ नेटवर्क एक्सेस दिया जा रहा है। वहीं कंपनी का इन प्लान को लेकर कहना है कि यह प्रीमियम सर्विस है लेकिन प्रतिस्पर्धी कंपनियां और कई विशेषज्ञ इसे नेट न्यूट्रैलिटी के नजरिए से देख रहे हैं। जिस कारण से अब यह मामला उद्योग जगत और नियामक संस्थाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है Airtel का नया Priority Network प्लान?

जानकारी के लिए बता दें कि Airtel ने अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की है जिसके अदंर यूजर्स को नेटवर्क कंजेशन के दौरान प्राथमिकता दी जाएगी। अगर इस बात को आसान भाषा में समझे तो जब किसी इलाके में नेटवर्क पर ज्यादा दबाव होगा तब इस प्लान के यूज़र्स को सामान्य ग्राहकों की तुलना में बेहतर स्पीड और स्थिर कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा। जिस कारण से इस को कई लोग VIP लेन और नॉर्मल लेन वाले मॉडल के रूप में भी देख रहे है।

क्या हो सकते हैं इसके नुकसान?

वहीं इस नए प्लान को लेकर विवाद की वजह यह है कि यदि कुछ यूज़र्स को नेटवर्क पर प्राथमिकता दी जाती है तो बाकी ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड प्रभावित होती रहेगी। लेकिन इसको लेकर Airtel ने दावा किया है कि उसके पोस्टपेड ग्राहक कुल यूज़र बेस का केवल 4% हैं और उसके 5G नेटवर्क की सिर्फ 38% क्षमता ही इस्तेमाल हो रही है। लेकिन फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि ऐसे प्रायोरिटी प्लान का ऑप्सन मिलता है तो सामान्य यूज़र्स को धीमे इंटरनेट का सामना करना पड़ेगा।

TRAI और नेट न्यूट्रैलिटी के नियम क्या कहते हैं?

जानकारी के लिए बता दें कि भारत में नेट न्यूट्रैलिटी का मूल सिद्धांत यह है कि सभी इंटरनेट ट्रैफिक के साथ समान व्यवहार किया जाएगा। जिसका सीधा मतलब है कि किसी वेबसाइट, ऐप या यूज़र को विशेष प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए। जिस कारण से इस बहस ने इतनी तेजी पकड़ी है। जिसमें इसके प्रायोरिटी नेटवर्क एक्सेस नेट न्यूट्रैलिटी की भावना के अनुरूप है या नहीं की बात हो रही है। वहीं सरकार और नियामक संस्थाएं इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी सामान्य यूज़र को इसी तरह के नुकसान का सामना तो नहीं करना पड़ रहा।

प्रतिस्पर्धी कंपनियों की क्या है प्रतिक्रिया?

वहीं Airtel के इस कदम को उठाने के बाद अब कई टेलीकॉम कंपनियों भी सवाल खड़े कर रही हैं। इस मामले पर Jio का कहना है कि यह तकनीक उपयोगी हो सकती है लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सरकार और नियामकों के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार करना चाहिए। जिसको लेकर कंपनियों का तर्क है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करते समय नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन होना ही चाहिए।

अभी के लिए Airtel अपने मॉडल को सुरक्षित और सीमित प्रभाव वाला बता रही है लेकिन आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नियम के लागू होने के बाद किसी आम ग्राहक को कोई परेशानी तो नहीं हो रही।

तेजपाल को जाना ही होगा जेल...सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई याचिका, सरेंडर के लिए दिया दो हफ्ते का टाइम

जंतर-मंतर हिंसा से दिल्ली पुलिस ने ली सीख, तैयार किया नया प्लान, अब हर बड़े प्रदर्शन पर ऐसे रखी जाएगी पैनी नजर

2027 की जनगणना से पहले राहुल गांधी और खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, जाति के आंकड़ों पर उठाए सवाल

6 साल में 41 मासूमों की मौत; अमरावती से झांसी तक अस्पताल बने आग का गोला, लेकिन एक भी दोषी को नहीं हुई सजा

मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान पर भड़के जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद, कहा- हिंदू धर्म विरोधी मानसिकता त्यागें