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टेक्नॉलजी

Meta, Google, X और Snapchat की आज संसद में बड़ी पेशी, PM मोदी का वीडियो हटाने के बाद एक्शन मोड में सरकार

Meta Summons: भारत में सोशल मीडिया की जवाबदेही को लेकर सरकार सख्त रुख अपना रही है। जिसमें IT पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने Meta, X, Google और Snapchat जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से बात करेंगी।

सिमरन सिंह

Digital Privacy: आज के समय में देखा जा रहा है कि भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। जिसमें सूचना एवं प्रौद्योगिकी (IT) पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने Meta, X, Google और Snapchat जैसी बड़ी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों को आज शाम 4 बजे तलब किया है। वहीं इसमें हाल ही में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को गलती से हटाए जाने के विवाद और डिजिटल प्राइवेसी से जुड़े सवालों के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इसको लेकर माना जा रहा है कि इस दौरान कंपनियों से सुरक्षा मानकों, डेटा संरक्षण और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर कई तीखे सवाल पूछे जाएंगे।

शाम 4 बजे होगी टेक कंपनियों से सीधी पूछताछ

जानकारी में सामने आ रहा है कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति देश में काम कर रही प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के अधिकारियों से आमने-सामने चर्चा की जाएंगी। वहीं इस बैठक में Meta जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप आता है X, Google और Snapchat के प्रतिनिधि शामिल होने वाले है। इस बैठक को लेकर सरकार का उद्देश्य यह जानना है कि ये कंपनियां भारतीय कानूनों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नियमों का कितना गंभीरता से पालन कर रही हैं।

तीन बड़े मुद्दों पर रहेगा पूरा फोकस

इस बैठक में सबसे पहले महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कंपनियों से जवाब मांगा जाएगा। इसके अलावा किसानों, ग्रामीणों, मजदूरों और आम नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी भी प्रमुख मुद्दा रहने वाली है। वहीं तीसरा और सबसे अहम सवाल यह होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सरकारी निर्देशों के पालन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका कितनी जिम्मेदार रहने वाली है।

PM मोदी का वीडियो हटने से क्यों बढ़ा विवाद?

बता दें कि इस पूरे मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ दिया गया वीडियो फेसबुक से अचानक हटा दिया गया था। बाद में Meta ने इसे तकनीकी गलती बताते हुए वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया लेकिन इस घटना ने कंटेंट मॉडरेशन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल प्राइवेसी पर नई बहस छेड़ दी। इसी के बाद सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली पर और कड़ी नजर रखने के संकेत दिए।

पेपर लीक से लेकर डेटा सुरक्षा तक बढ़ी चिंता

देखा जा रहा है कि यह घटनाक्रम नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद और उसके बाद चले 36 दिनों के छात्र आंदोलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी। इसी दिशा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 भी पेश किया गया जिसमें 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

वहीं अब संसदीय समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत में काम करने वाली कोई भी विदेशी टेक कंपनी नागरिकों के डेटा का दुरुपयोग न कर सके और संवेदनशील राष्ट्रीय मामलों में गलत या भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने के लिए पूरी जिम्मेदारी निभाए। ऐसे में आज की बैठक से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए सुरक्षा मानकों और जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत सामने आ सकते हैं।

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