अमेरिकी अदालत ने मेटा पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया  (AI जनरेटेड इमेज)
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बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही META को पड़ी भारी! US कोर्ट ने लगाया ₹5,000 करोड़ का जुर्माना, बदलाव के आदेश

Meta Mental Health Lawsuit: अमेरिका की अदालत ने बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा मामले में मेटा पर 567 मिलियन डॉलर खर्च करने का आदेश दिया। फेसबुक और इंस्टाग्राम में बदलाव के आदेश दिए हैं।

अक्षय साहू

Meta Child Safety Penalty: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा की मुस्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में कंपनी को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो बिना बताए फेसबुक से हटाने पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसी बीच अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक अदालत ने कंपनी पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है। 

जानकारी के मुताबिक, अदालत ने कंपनी पर यह जुर्माना बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत से जुड़े एक बड़े मामले में लगाया है। अदालत ने कंपनी को 567 मिलियन डॉलर खर्च करके युवाओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई नए कदम उठाने का आदेश दिया है। यह पैसा इलाज, जागरूकता अभियान, ऑनलाइन सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।

मेटा पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना

न्यू मैक्सिको की अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों की भी यह जिम्मेदारी है कि उनके प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के लिए सुरक्षित हों। अदालत के मुताबिक, 567 मिलियन डॉलर में से 420 मिलियन डॉलर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सहायता कार्यक्रमों पर खर्च किए जाएंगे। बाकी रकम अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग और अन्य सुरक्षा उपायों पर लगाई जाएगी।

यह मामला पहले भी मेटा के लिए महंगा साबित हुआ था। मुकदमे के पहले चरण में जूरी ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगाया था। जूरी का मानना था कि मेटा को पता था कि उसके प्लेटफॉर्म का बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसके अलावा कंपनी पर यह आरोप भी लगा कि उसने बाल यौन शोषण से जुड़े खतरों के बारे में पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की।

फेसबुक और इंस्टाग्राम में बदलाव के आदेश

अदालत ने फेसबुक और इंस्टाग्राम में कई बदलाव करने के भी आदेश दिए हैं। अब इन प्लेटफॉर्म पर ऐसे सूचना पैनल और बैनर दिखाए जाएंगे, जिनमें यूजर्स को सुरक्षा फीचर्स, प्राइवेसी सेटिंग्स, आपत्तिजनक टिप्पणियों से बचाव और सुरक्षित तरीके से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की जानकारी मिलेगी। न्यू मैक्सिको में चलने वाले जागरूकता अभियानों की निगरानी राज्य प्रशासन करेगा।

उम्र सत्यापन के मामले में अदालत ने कहा कि अमेरिका के बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता कानून (COPPA) के कारण 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बहुत सख्त नियम लागू करना आसान नहीं है। इसलिए अदालत ने मेटा को छोटे बच्चों से अतिरिक्त निजी जानकारी मांगने या उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी करके उम्र की पुष्टि करने का आदेश नहीं दिया।

आयु सत्यापन प्रणाली पर भी निर्देश

हालांकि, अदालत ने मेटा को अपनी आयु सत्यापन प्रणाली मजबूत करने के लिए कहा है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह अनुमान लगाएगी कि कोई यूजर 13 साल से कम उम्र का तो नहीं है। इसके लिए दोस्तों का नेटवर्क, देखी जाने वाली सामग्री और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों जैसे संकेतों का उपयोग किया जाएगा। अगले दो वर्षों में ऐसे विशेष AI मॉडल भी तैयार किए जाएंगे, जो कम उम्र के संभावित यूजर्स की पहचान कर सकें।

अदालत ने मेटा को स्कूलों और बाल सुरक्षा संगठनों के साथ मिलकर एक रिपोर्टिंग पोर्टल बनाने का भी निर्देश दिया है। इसके जरिए स्कूल कर्मचारी ऐसे अकाउंट की शिकायत कर सकेंगे, जिनके बारे में शक हो कि वे 13 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा चलाए जा रहे हैं। साथ ही कंपनी को ऐसे बच्चों की निजी जानकारी हटाने के लिए भी कहा गया है।

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