Highlight:
Satellite Internet एक नया विकल्प भारत के लिए बन सकता है।
Starlink ने अभी भारत के लिए अपने प्लान की कीमत घोषित नहीं की है।
Starlink अमेरिका में 100Mbps वाले प्लान की कीमत 55 डॉलर प्रति महीने है।
Jio Vs Starlink Features: भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है। वैसे अभी ज्यादातर शहरों और कस्बों में फाइबर केबल के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट मिलता है लेकिन पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में अब भी कनेक्टिविटी एक चुनौती है। ऐसे क्षेत्रों के लिए Satellite Internet एक नया विकल्प बन सकता है। वहीं भारत में इस बाजार में रिलायंस जियो, एलन मस्क की Starlink और एयरटेल समर्थित Eutelsat OneWeb की एंट्री की तैयारी है।
लेकिन इन कंपनियों को लाइसेंस मिलना और आम ग्राहकों के लिए सर्विस शुरू होना दो अलग बातें हैं। वहीं 6 नवंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी में देखा गया है कि तीनों कंपनियों की कमर्शियल सर्विस शुरू होने से पहले कुछ सरकारी मंजूरियां और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया बाकी है। ऐसे में सवाल है कि Jio Fiber और Starlink के इंटरनेट में क्या अंतर होगा और ग्राहकों की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
भारत में अभी फाइबर ब्रॉडबैंड इंटरनेट की कीमत सैटेलाइट इंटरनेट के मुकाबले काफी किफायती रहने की उम्मीद की जा रही है। लेकिन Starlink ने अभी भारत के लिए अपने प्लान की कीमत घोषित नहीं की है। इसलिए दोनों सेवाओं की सीधी कीमत तुलना करना फिलहाल संभव नहीं है।
लेकिन मौजूदा फाइबर प्लान देखें तो JioFiber में 100Mbps स्पीड वाला प्लान 899 रुपये प्रति महीने (GST अतिरिक्त) में उपलब्ध है। वहीं Airtel Xstream Fiber का 100Mbps प्लान 799 रुपये प्रति महीने (GST अतिरिक्त) से शुरू होता है। ये दोनों कंपनियों के आधिकारिक प्लान हैं।
वहीं Starlink अमेरिका में 100Mbps वाले रेजिडेंशियल प्लान की शुरुआती कीमत 55 डॉलर प्रति महीने बता रही है। लेकिन यह अमेरिकी कीमत है इसे भारतीय ग्राहकों के संभावित खर्च के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
फाइबर इंटरनेट में ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए डेटा घर तक पहुंचता है। इसके उलट Starlink आसमान में मौजूद लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट के नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। ये सैटेलाइट पृथ्वी से करीब 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाते हैं।
घर की छत पर एक विशेष एंटीना या डिश लगाई जाती है जो सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करती है। इसके बाद राउटर की मदद से घर के अंदर Wi-Fi इंटरनेट चलता है। कम ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट के कारण पारंपरिक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट इंटरनेट की तुलना में लेटेंसी भी कम हो सकती है।
सैटेलाइट इंटरनेट का सबसे बड़ा फायदा उन जगहों पर मिलेगा जहां फाइबर केबल पहुंचाना मुश्किल या महंगा है। जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को इससे बेहतर कनेक्टिविटी का विकल्प मिल सकता है।
लेकिन शहरों में पहले से फाइबर कनेक्शन इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए कीमत और स्पीड महत्वपूर्ण होंगी। वहीं अभी के लिए भारत में Jio, Starlink और OneWeb की सर्विस शुरू होने की अंतिम मंजूरी बाकी है। साथ ही 6 नवंबर की सरकारी जानकारी में बताया गया है कि सुरक्षा शर्तें और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े कदम पूरे होने के बाद ही कमर्शियल सेवाएं शुरू हो सकेंगी।